Thursday, November 21, 2019

जीवन में संघर्षों से दूर रहना सीखें, मिथ्यात्व मोह छोड़ें

बाजना | अभिनिवेशक का अर्थ है झूठा दुराग्रह असत्य की पकड़ जहां मिथ्यात्व होता है वहां संघर्ष होता है। हट ग्रह का उद्भव अभिमान से होता है इस कारण व्यक्ति जैसा चाहता है दूसरे से वैसा करने को कहता है। जीवन में संघर्षों से दूर रहना सीखें मिथ्यात्व मोह को छोड़ें समकित भाव रखें जीवन सार्थक होगा।

यह बात गणीवर्य आदर्श र| सागर जी ने आदर्श आत्मा स्पर्शी वाटिका में धर्मसभा में कहा। उन्होंने कहा कि मनुष्य सभी प्रकार की सावधानी से आचरण करता हो, क्रोध आदि कषाय मंद हो, पंच महाव्रत रूप बाह्य चरित्र से युक्त हो, तब भी समकित रहित हो अर्थात मिथ्यात्वी हो तो वह कभी मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता। मिथ्यात्व 25 प्रकार के होते हैं। उसमें से अभीनिवेशक मिथ्यात्व छोड़ना बहुत कठिन होता है। उपधान तप 45वें दिवस आयंबिल के लाभार्थी महिपाल संदीप गजेंद्र कोठारी परिवार का रहा। संघ पूजा का लाभ संजय पालरेचा ने लिया। उपध्यान तप के तपस्वी चिराग कोठारी, व तुषार पालरेचा का बहुमान श्री संघ की ओर से विनोद पालरेचा, विमल कोठारी, रमेश चौरड़िया ने किया।



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source https://www.bhaskar.com/mp/ratlam/news/mp-news-learn-to-stay-away-from-conflicts-in-life-quit-falsehood-073049-6001118.html

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