Tuesday, November 26, 2019

कठोरा उद्वहन से सिंचाई के लिए किसानों से नहीं किया अनुबंध, नहीं कर पा रहे बुवाई

रबी सीजन की बुवाई का क्रम शुरू हो चुका है। लेकिन क्षेत्र के अधिकांश खेत तैयार होने के बाद भी किसान बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। इसका कारण कठोरा उद्वहन परियोजना से पानी नहीं छोड़ना बताया जा रहा है। किसानों का कहना है परियोजना के जुड़े अफसर हर साल सिंचाई के पानी को लेकर अनुबंध करते हैं। लेकिन इस बार अनुबंध तक नहीं किया गया। एसडीओ का कहना है परियोजना का मेंटनेंस चलने से अभी अनुबंध नहीं किया है। करीब 100 करोड़ रुपए की परियोजना का शुभारंभ वर्ष 2009 में हुआ था। 27 गांव तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग 4 टंकियां बनाई गई है। पहली मोगावां, दूसरी दोगावां, तीसरी अहिल्यापुरा व चौथी गोपालपुरा में है। इस परियोजना से 6669 हैक्टेयर में किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ दिया जाना था। लेकिन अब तक लक्ष्य के अनुरूप सभी किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाया है।

किसान भगवान दरबार, राजेंद्र पटेल व विजय पाटीदार ने कहा हर साल परियोजना से जुड़े नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण विभाग का स्टॉफ बदल जाता है। यह भी पता नहीं है कि सब इंजीनियर कौन है। एसडीओ कब आते हैं। परियोजना का निरीक्षण कब करते हैं। इस स्थिति में समस्या किसे बताएं। इस साल सिंचाई का अनुबंध करने के लिए भी कोई नहीं आया। अधिकारियों से चर्चा करते है तो वे जल्द पानी मिलने का आश्वासन देते है।

िकसानों ने कहा- हर साल स्टाफ बदलने से आ रही परेशानी

कठोरा उद्वहन परियोजना का पंप हाउस, जिसके मेंटेनेंस की बात कहकर पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।

पानी की उम्मीद में तैयार कर लिए हैं खेत

किसान सुरेंद्र पाटीदार, सुधीर मंडलोई, भूरेसिंह पटेल ने कहा 10 नवंबर से क्षेत्र में रबी सीजन की बुवाई शुरू हुई। अच्छी बारिश के बाद जिन किसानों के कुएं में पानी है उन्होंने गेहूं व चना लगाने के साथ सिंचाई भी शुरू कर दी है। परियोजना से जुड़े किसानों ने भी पाइप लाइन से पानी आने की उम्मीद में खेत तैयार कर लिए, लेकिन अब तक बुवाई नहीं कर पाए हैं। देरी से पानी छोड़ने से फसल पिछड़ने के साथ उत्पादन पर असर पड़ेगा। ज्यादा बारिश से खरीफ सीजन की फसलें पहले ही खराब हो चुकी है। रबी फसलों से बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन वह भी परियोजना से जुड़े लोगों के कारण टूटती नजर आ रही है। कृषि विभाग के अनुसार इस साल 40 हजार हैक्टेयर में रबी बुवाई का लक्ष्य है। अब तक 1500 हैक्टेयर में गेहूं और 1800 हैक्टेयर में चना की बुवाई हुई है। एक सप्ताह में रकबा बढ़ने की उम्मीद है।

और इधर...अच्छे उत्पादन के लिए करवाएं मिट्‌टी परीक्षण

भगवानपुरा |
यहां सोमवार को कृषि कैंप का आयोजन हुआ। किसानों को जैविक खेती व नई पद्धति से खेती करने का तरीका बताया गया। कई कंपनियों ने अच्छी किस्म के बीज व उत्पादन क्षमता बढ़ाने की विधि बताई। किसानों से कहा मिट्‌टी परीक्षण से जमीन में पोषक तत्वों की अधिकता व कमी की जानकारी मिलती है। इसकी पूर्ति कर अच्छा उत्पादन हासिल किया जा सकता है। किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी बीएल मंडलोई, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी दिलीप कानूनगो, बीटीएम अधिकारी अशोक पाटीदार सहित किसान मौजूद थे।

मेंटनेंस पर लागत से ज्यादा खर्च, नहीं बदले हालात

10 साल से गुजरात सरकार के माध्यम से परियोजना का संचालन हो रहा है। शुरुआती दिनों में ही परियोजना खटाई में पड़ गई। पाइप लाइन लीकेज होती रही। किसान स्वयं लीकेज दुरुस्त करवा रहे हैं। यह क्रम अब भी जारी है। जबकि दो बार मरम्मत के नाम पर लागत से दुगुनी राशि खर्च हो चुकी है। कोई बदलाव नहीं हुआ। पानी छोड़ते ही पाइप लाइन लीकेज हो जाती है। किसानों के खेतों में गड्‌ढे हो जाते है। यदि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिले तो मौसमी फलों का उत्पादन कर आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं। वर्तमान में भी अधिकारी मेंटेनेंस होने से पानी नहीं छोड़ने की बात कह रहे हैं, जबकि यह काम पहले भी हो सकता था। वहीं कर्मचारियों की माने तो मेंटेनेंस का काम पूरा हो चुका है। पानी छोड़ने के लिए सिर्फ अधिकारियों के आदेश का इंतजार है।

7 दिन में मिलने लगेगा पानी

वर्तमान में मशीनों के पाॅवर हाउस का मेंटेनेंस किया जा रहा है। यह काम एक सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा। - डीएस परिहार, एसडीओ, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण विभाग खरगोन



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KASRAWAD News - mp news kathora has not contracted with farmers for irrigation they are not able to sow


source https://www.bhaskar.com/mp/khargon/news/mp-news-kathora-has-not-contracted-with-farmers-for-irrigation-they-are-not-able-to-sow-081557-6037338.html

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