देह त्यागने के बाद उसे अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम स्थल पर ले जाते समय परेशानियों का सामना करना पड़ता था। यहां नदी किनारे अंतिम संस्कार किए जाने पर उतरने के लिए सीढ़ियां नहीं थीं। इसको लेकर पिछले काफी समय से चर्चा चल रही थी लेकिन कोई आगे नहीं आया। कुछ युवाओं ने आगे आकर जनसहयोग से सीढ़ियों का निर्माण करवाया है।
गांव में बारिश को छोड़कर नदी किनारे ही दाह संस्कार होता है। शव यात्रा यहां तक ले जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था क्योंकि नदी किनारे उतरने के लिए कुछ साधन नहीं बना हुआ था। जब भी किसी का निधन होता है तब अंतिम संस्कार के दौरान सभी यहां सीढ़ियां बनाने की बात करते थे लेकिन आगे कोई नहीं आता था। पर्यावरण संरक्षण व ग्राम उत्थान संस्था के युवाओं ने सीढ़ियों को बनाने का जिम्मा लेते हुए जनसहयोग से यहां सीढ़ियों का निर्माण करवाया। बारिश के दिनों में अंतिम संस्कार के स्थल पर तो शेड बना है लेकिन अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों के लिए शेड नहीं है। अवधेश प्रतापसिंह राठौर, मुकेश बैरागी, मंथन नागर, हर्ष ठाकुर, संदीप सेन, रेवांस ठाकुर, आजाद कुमावत, पीयूष परमार ने सीढ़ियों का निर्माण करवाया।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/news/stairs-built-on-the-site-of-mukti-dham-with-public-cooperation-in-rawati-128082322.html
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