भले ही कोरोना के कारण नए साल की पार्टियों का जश्न फीका था, पर प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा नदी के किनारे स्थित करीब दो दर्जन होटलों, रेस्तरां, रिसॉर्ट वालाें ने आबकारी के घुमावदार नियमों का लाभ उठाकर शराब भी परोसी और कुछ ने ग्रामीण क्षेत्र का लाभ उठाकर डीजे भी बजाए।
सोशल मीडिया पर पार्टीबाजों ने जो वीडियो और फोटो अपलोड किए हैं, उनमें साफ दिख रहा है कि नियम-कायदों का किस तरह उल्लंघन किया गया है? हालाँकि आबकारी विभाग का सीधा कहना है कि नए साल के दिन उनकी टीम ने एक-एक संदिग्ध ठिकाने की जाँच की और उन्हें कोई गड़बड़ी नहीं मिली। ये भी उल्लेखनीय तथ्य है कि इनमें से कई होटल-रेस्तरां और रिसॉर्ट आम दिनों में भी बिना लायसेंस शराब परोसते हैं।
पुण्य सलिला के सम्मान में प्रतिबंध
पिछली बार जब भाजपा सरकार आई थी, तब नर्मदा को पुण्य सलिला का सम्मान देते हुए उसके किनारे से 5 किमी तक शराब की बिक्री प्रतिबंधित कर दी थी। कांग्रेस सरकार के आने पर इस नियम को बदलवाने के लिए काफी प्रयास हुए, पर कुछ हो नहीं पाया और सरकार भी चली गई। ये नियम अभी भी बरकरार है, जिसे लेकर कभी-कभी कार्रवाई होती है।
दुर्घटना रोकने हाईवेज पर मनाही
इसके साथ ही एक नियम हाईवेज का भी है। किसी भी हाईवे पर शराब दुकान नहीं खोली जा सकती, न ही उसका प्रचार किया जा सकता है, ताकि दुर्घटनाएँ रोकी जा सकें। इस नियम के उल्लंघन का नजारा हर हाईवे पर देखा जा सकता है, जहाँ लाल रंग से केवल दुकान लिखकर और एरो लगाकर यह बता दिया जाता है कि किस गली में शराब दुकान है।
अलग-अलग है नियम की व्याख्या
नए साल के जश्न में जबलपुर में 10 अस्थायी लायसेंस दिए गए। आबकारी विभाग का कहना है कि एक भी लायसेंस, शर्तों का उल्लंघन कर नहीं दिया गया, पर शर्तें क्या हैं? इसे लेकर काफी मतभिन्नता है। जब प्रदेश सरकार ने ये 5 किलोमीटर वाला नियम लागू किया था तो ग्वारीघाट रोड पर स्थित एक बार बंद हो गया था, जबकि तब भी यही तर्क िदया गया था कि ये नियम शराब दुकानों के लिए है। राजपत्र में भी स्पष्ट तौर पर शराब दुकान का ही उल्लेख है, लेकिन आबकारी विभाग का मानना है कि जहाँ भी शराब बेची जाती है, वहाँ लायसेंस नहीं देते हैं।
ओकेजनल अर्थात् एक दिन के लायसेंस को लेकर आबकारी विभाग और रेस्तरां-होटल वालों की व्याख्या अलग-अलग है। होटल वाले मानते हैं कि प्राइवेट पार्टी वाले के नाम पर लायसेंस लेते हैं, जिसमें शराब बेची नहीं जाती। वहीं कुछ होटल अपना मुख्य रास्ता ऐसे तय करते हैं कि वो 5 किलोमीटर से ज्यादा हो जाए और लायसेंस मिल जाए। वहीं आबकारी वाले कहते हैं कि चैकिंग में अगर बिक्री के सबूत मिले तो कार्रवाई करते हैं।
बिना परमीशन पिलाई शराब, 4 होटलों के लायसेंस होंगे निरस्त
नये साल का जश्न मनाने शहर की 4 होटलों में बिना लायसेंस लिये शराब पिलाते पाये जाने पर आबकारी विभाग की टीम ने प्रकरण दर्ज किया था। सहायक आयुक्त आबकारी एसएन दुबे का कहना है कि एक दिन का ओकेजनल लायसेंस भी विभाग द्वारा जारी किया जाता है, लेकिन 31 जनवरी की रात में टीम द्वारा जब जाँच की गई तो नगर निगम कार्यालय के पास स्थित होटल कोजी व मसाला एक्सप्रेस, के साथ ही होटल बिनको लॉन तिलवारा व होटल मिडटाउन रसल चौक में बिना अस्थाई लायसेंस लिये शराब परोसी जा रही थी। नियम विरुद्ध इन होटलों में शराब परोसी गई, इसलिये अब इनके होटल लायसेंस िनरस्त कराये जायेंगे।
स्पष्ट है नियम
दरअसल, नर्मदा के किनारे नए साल पर छोटे-बड़े करीब दो दर्जन होटल, रेस्तरां और रिसॉर्ट में कार्यक्रम हुए। इसमें किसी ने भी ऑफिशियल शराब परोसने का दावा नहीं किया, पर बिना शराब के नए साल की पार्टीं भी नहीं हुई, ये तय है, सोशल मीडिया पर अपलोड फोटोज इसका सबूत देते हैं।
नर्मदा किनारे के होटल वालों का कहना है कि लोगाें ने अपनी कार में बोतल लेकर शराब पी ली, पर प्रश्न ये उठता है कि अगर वो शराब परोस नहीं रहे थे तो लायसेंस के लिए एप्लाई ही क्यों किया? इस प्रश्न का जवाब न तो पार्टी करने वालों के पास है और न ही आबकारी विभाग के पास।
आबकारी विभाग की टीम भी केवल ये देखती रही कि शराब बेची तो नहीं जा रही? और उसे एक भी होटल में शराब बेचते हुए कोई नहीं मिला, पर क्या ये विश्वसनीय है? नए साल की पार्टी बिना शराब के हो सकती है? अगर नहीं तो फिर प्रदेश सरकार द्वारा नर्मदा को सम्मान देने का जो प्रयास किया गया है, उस नियम का क्या? फिर तो नर्मदा पर चलने वाले क्रूज पर भी ऑफिशियल शराब परोसी जा सकती है।
डीजे पर जमकर मस्ती
एक नियम ये भी बना था कि कोरोना के कारण डीजे प्रतिबंधित रहेगा, लेकिन नर्मदा बल्कि नेशनल हाईवे के किनारे बने एक होटल ने इस नियम की भी धज्जियाँ उड़ा दीं। उसने न केवल नर्मदा से 5 किमी और हाईवे से 500 मीटर के नियमों की व्याख्या बदल दी, बल्कि डीजे पर लोगों को खूब नचाया। इतना ही नहीं डीजे भले ही लोकल था पर आर्टिस्ट बाहर से बुलाकर जमकर जश्न मनाया गया, जबकि बाहर से आर्टिस्ट बुलाने पर भी प्रतिबंध था।
कहाँ-कहाँ हुआ उल्लंघन
नर्मदा किनारे जमतरा के नए पुल से लेकर भेड़ाघाट तक करीब दो दर्जन होटल, रेस्तरां और रिसॉर्ट हैं, जहाँ पार्टियाँ हुईं, प्राइवेट पार्टियाँ हुईं। इनमें से कुछ में डीजे थे, बाकी ने नियमों के तहत् आर्केस्ट्रा का आयोजन किया, पर शराब हर जगह थी। भले ही परोसी गई या बेची गई, इसका कोई रिकाॅर्ड नहीं है, लेकिन लोगों ने जमकर पी और नाचे भी।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/liquor-served-in-the-new-year-at-hotel-restaurants-along-the-banks-of-the-narmada-and-highway-by-making-a-curved-path-of-rules-128081499.html
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