जबलपुर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 64 एवं 65 में किसानों से ली गई भूमि का मामला अब उलझ गया है। एक तरफ तो चार सालों में जेडीए ने भूमि का विकास नहीं किया और अब केवल 60 दिनों का समय देकर किसानों से मुआवजा माँगा जा रहा है। किसानों ने इस मामले में प्रदर्शन किया और कहा कि यदि समयसीमा में वृद्धि नहीं की गई तो तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
बताया जाता है कि पूर्व नियमों के आधार पर जेडीए ने योजना क्रमांक 64 एवं 65 के लिए करीब दो सौ हैक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। उस समय नियम यह था कि जेडीए भूमि विकसित करेगी और 20 फीसदी प्लॉट किसानों को दे दिए जाएँगे। बाद में नियमों में बदलाव आया और कहा गया कि किसानों को 50 फीसदी प्लॉट दिए जाएँगे, लेकिन इसके लिए किसानों को वह राशि देनी होगी जो जेडीए ने जमीन के विकास में खर्च की है।
इस हिसाब से हर किसान को प्रति एकड़ 80 हजार रुपए जमा करने हैं। इस मामले में किसानों ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि जेडीए ने जब से जमीन अधिग्रहित की है तब से किसान न किसानी कर पा रहे हैं और न ही कोई और काम, कोरोना ने हालत और खराब कर दी। अब ऐसे में यह राशि कैसे जमा की जाएगी। किसानों ने संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपकर यह माँग की है कि 6 जनवरी की समयसीमा को कम से कम 6 माह और बढ़ाना होगा।
जेडीए हुआ मालामाल, 57 सौ वर्गफीट में बिका आवासीय प्लॉट
जबलपुर विकास प्राधिकरण ने एक ही दिन में करीब 3 सौ प्लॉटों का विक्रय किया। इसमें रिकाॅर्ड कमाई की गई। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह रही कि उखरी में रहवासी क्षेत्र का प्लॉट 57 सौ रुपए प्रतिवर्ग फीट की दर से बिका। जेडीए ने योजना क्रमांक 41, शताब्दीपुरम द्वितीय चरण और योजना क्रमांक 5 विजय नगर में करीब तीन सौ प्लॉटों के विक्रय के लिए शनिवार तक का समय दिया था। देर रात तक चली प्रक्रिया में जेडीए को करोड़ों रुपयों का मुनाफा हुआ है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/farmers-asked-for-time-from-jda-can-not-deposit-amount-128081603.html
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