Friday, December 4, 2020

23922 हेक्टेयर में खराब हुई थी फसल, 14 हजार किसानों को एक साल बाद भी नहीं मिला मुआवजा

साल 2019-20 में जिले के 20 हजार से ज्यादा किसानाें की सरसाें की फसल अतिवृष्टि के कारण नष्ट हो गई थी। इन किसानों ने फसल बीमा के एक करोड़ 4 लाख रुपए प्रीमियम जमा किया था लेकिन एक साल बाद भी इन्हें फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा नहीं मिला है। अब रबी सीजन में गेहूं व सरसों की फसल का बीमा कराने के लिए किसानों पर फिर दबाव बनाया जा रहा है।

26763 किसानों ने गेहूं व सरसों की फसल का बीमा 2019-20 में कराया था। इसके लिए ऋणी व अऋणी किसानों ने एक करोड़ 3 लाख 94 हजार रुपए की प्रीमियम बीमा कंपनी को अदा की थी। इसमें 26717 किसान ऋणी थे और 46 अऋणी। बीमा कंपनी के सर्वे में 23922 हेक्टेयर में सरसों की फसल को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट तैयार की थी। फसल बीमा के भुगतान का प्रस्ताव भोपाल में मंजूरी के लिए 8 महीने से लंबित है लेकिन पीड़ित 14000 किसानों को फसल बीमा का पैसा अब तक नहीं मिला है। बीमा कंपनी की दलील है कि भू-अभिलेख विभाग ने फसल कटाई के आंकड़े देर से उपलब्ध कराए इसलिए बीमा धन मंजूर करने में देरी हो रही है।

6880 में से सिर्फ 488 किसानों को मुआवजा
खरीफ सीजन 2019 में बाजरा की फसल भी अधिक बारिश के कारण खराब हो गई थी। फसल बीमा योजना के तहत 6880 किसानों के खाते में मुआवजा जारी किया जाना चाहिए था लेकिन बीमा कंपनी ने अब तक 488 किसानों के खातों में 80 लाख रुपए भेजे हैं। 2019 में बाजरा की बोवनी के दौरान 10877 ऋणी व 399 अऋणी कुल 11276 किसानों ने 13792.26 हेक्टेयर में बाजरा की फसल बीमा के लिए 52 लाख रुपए की प्रीमियम बीमा कंपनी को दिया था।

31 दिसंबर फसल बीमा की अंतिम तारीख
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रबी सीजन की सरसों, गेहूं व चना की फसल का बीमा कराने के लिए 31 दिसंबर की अंतिम तिथि घोषित की गई है। बीमा कंपनी के जिला प्रबंधक ब्रजेश चौरसिया का कहना है कि प्रशासन ने अभी तक फसल बीमा का लक्ष्य तय नहीं किया है। इस कारण उप संचालक कृषि पीसी पटेल ने मैदानी कर्मचारियों की ड्यूटी सरसों व गेहूं की फसल का सर्वे करने के लिए नहीं लगाई है। यही कारण है कि पटवारी भी रबी सीजन की फसल के रकबा का सर्वे करने के लिए खेतों पर नहीं पहुंचे हैं।

50 हजार से ज्यादा अऋणी किसान उगा रहे सरसों
रबी सीजन में जिले के 50 हजार से ज्यादा किसान सरसों, गेहूं व चना की फसल उगा रहे हैं लेकिन फसल बीमा की स्थिति पर गौर करें तो 2019-20 में 26717 किसान ऋणी और 46 अऋणी किसानों ने ही फसल बीमा कराने में रुचि ली। फसल बीमा का भुगतान लटकने से किसानों का विश्वास योजना से उठ गया है।

डेढ़ लाख मेंं सरसों व 99 हजार हेक्टेयर में गेहूं बोया
2020-21 के रबी सीजन की फसलों की बोवनी की बात करें तो कृषि विभाग ने 1.51 लाख हेक्टेयर में सरसों की बोवनी व 99 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी का लक्ष्य तय किया है। इसमें से अभी तक 1.48 लाख हेक्टेयर में सरसों बोई जा चुकी है। 73 हजार 771 हेक्टेयर में गेहूं की बोवनी हो चुकी है।

इधर, आयुक्त बोले- खाद की किल्लत हुई तो कार्रवाई तय
चंबल आयुक्त आशीष सक्सेना ने शुक्रवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सरसों व गेहूं की फसल के लिए यूरिया खाद की उपलब्ध के संबंध में उप संचालक पीसी पटेल से चर्चा की। आयुक्त ने कहा कि सरसों की टॉप ड्रेसिंग पर किसानों को यूरिया खाद की जरूरत होगी। इसके लिए अभी से खाद का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए। खाद काे लेकर कालाबाजारी की शिकायत सामने आई या किल्लत के चलते कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय होगी।

बीमा धन जल्द ही किसानों के खाते में ट्रांसफर होगा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में रवी सीजन की फसल सरसों, गेहूं व चना का बीमा 31 दिसंबर तक कराया जाना है। चूंकि अभी तक प्रशासन ने बीमा लक्ष्य तय नहीं किया इसलिए कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने बोई गईं फसलों का सर्वे नहीं किया है। बीमा धन जल्द ही किसानों के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा।
ब्रजेश चौरसिया, जिला प्रबंधक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना



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गेहूं की फसल का अंकुरण होने के बाद बोवनी का सर्वे नहीं हो रहा।


source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/morena/news/the-crop-was-damaged-in-23922-hectares-14-thousand-farmers-did-not-get-compensation-even-after-one-year-127979309.html

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