नामली के तत्कालीन प्रभारी सीएमओ अरुणकुमार ओझा को नगरीय प्रशासन और विकास आयुक्त निकुंज कुमार श्रीवास्तव ने निलंबित कर दिया है। ओझा पर गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के साथ ही 48 घंटे से ज्यादा जेल में रखे जाने के कारण उन्हें निलंबित किया है।
उल्लेखनीय है 10 मई 2019 को प्रधानमंत्री आवास के प्रचार के मामले में कांग्रेस के कुछ नेताओं की अरुण ओझा की शिकायत की थी। इस पर उन्हें निलंबित कर उज्जैन संभाग मुख्यालय पर अटैच किया था। वहां से उन्हें जबलपुर की बरेला नगर परिषद में राजस्व उप निरीक्षक के पद पर भेजा था। नगरीय प्रशासन व विकास सचिव गुलशन बावरा द्वारा 26 मई को जारी आदेश में सीएमओ को 28 मई को पुन: नामली ट्रांसफर कर दिया था। इसको लेकर नामली नगरवासियों ने 31 मई को सीएमओ हटाओ संघर्ष समिति बनाकर उन्हें पद से हटाने व 8 बिंदुओं की जांच करने की मांग करते हुए धरना दिया था। 3 जून को संघर्ष समिति ने सीएमओ की शवयात्रा निकालकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। तब उन्होंने सभी को आश्वस्त किया था कि मामले की जांच की जाएगी। नगर परिषद नामली के तत्कालीन पार्षद प्रकाश कुमावत ने 1 जुलाई 2019 को परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष नरेंद्र सोनावा व तत्कालीन सीएमओ अरुणकुमार ओझा के खिलाफ प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। तत्कालीन कलेक्टर ने ग्रामीण एसडीएम से शिकायत की जांच कराई थी। जांच में अध्यक्ष व सीएमओ दोनों को संयुक्त रूप से भ्रष्टाचार का दोषी पाया था। जांच के बाद दोनों के खिलाफ नामली थाने में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
ट्रांसफर आदेश आते ही गिरफ्तार कर लिया था
ओझा की पदस्थापना सतना जिले में होकर 31 अगस्त को ही उनका ट्रांसफर सतना से रतलाम हुआ था। ओझा को परियोजना अधिकारी बनाया गया था। ट्रांसफर आदेश आते ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वे पुलिस रिकॉर्ड में फरार थे, जबकि सतना में नौकरी कर रहे थे और उनका ट्रांसफर भी किया था।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/news/cmo-ojha-then-in-charge-of-namli-suspended-due-to-irregularities-127919226.html
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