परिचय-शांत मन वीरता का आभूषण है। इस आसन में सारी चंचलता और उत्तेजना दूर हो जाती है इसीलिए इसे वीरासन के नाम से जाना जाता है। विधि-वज्रासन की स्थिति में बैठते हैं, फिर दाहिने पैर को उठाते हैं और दाहिने पंजे को बाएं पैर के घुटने के पास रख देते हैं, दाहिने पैर का घुटना आसमान की ओर हो जाता है, फिर दाहिने हाथ की कोहनी को दाहिने पैर के घुटने पर रखते हुए हुए हथेली के ऊपर ठुड्डी को रखते हैं। इस अवस्था में आंखें बंद करके विश्राम करते हैं। रीढ़ और सिर को सीधा रखते हैं। शरीर में किसी प्रकार की गति नहीं होती है, फिर इसी क्रिया को बाएं पैर से दोहराते हैं।
लाभ-यह बहुत सरल आसन है ध्यान लगाने के लिए इस आसन का उपयोग किया जा सकता है, विद्यार्थियों के लिए मन को केंद्रित करने के लिए और एकाग्रता के अभ्यास को बढ़ाने के लिए यह आसन बहुत लाभदायक है। इस आसन में वज्रासन के लाभ भी प्राप्त होते हैं। यह आसन उत्तेजना और चंचलता को कम करने में लाभदायक है। यह आसन हमारे नर्वस सिस्टम को संवेदनशील बनाता है अगर व्यक्ति उत्तेजित हो रहा है या चंचल है तो उसे इस आसन में बैठाना चाहिए।
सावधानी-जिसे घुटनों में दर्द हो अथवा एड़ी में दर्द हो उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।
राजीव श्रीवास्तव, योग शिक्षक
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/news/veerasan-removes-agility-and-excitement-127693823.html
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