शहर के ऑटो सवारियों से ठसाठस चल रहे हैं। ऑटो चालक कमाई के चक्कर में सोशल डिस्टेंसिंग तो छोड़ो सवारियों को मास्क लगाने तक नहीं बोलते। इधर मेट्रो कम चलने के कारण ऑटो ही परिवहन का मुख्य साधन बन रहे हैं। छोटी लाइन फाटक, तीन पत्ती, मालगोदाम, रानीताल, दमोहनाका, दीनदयाल चौक, मेडिकल लगभग हर चौराहों-तिराहों पर दिखने वाले ऑटो के यही हाल हैं। अभी तो स्थिति यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के ऑटो भी शहरी सीमा में धड़ल्ले से बेरोकटोक चल रहे हैं।
सवारियों ने बताया कि इस महामारी का फायदा उठाते हुए ऑटो चालक मनमाना किराया भी वसूल रहे हैं। सवारियों की मानें तो सभी रूटों पर मेट्रो का संचालन न होने से उन्हें आने-जाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए ऑटो ही एक विकल्प बचता है।
ऐसे बन रहे हालात
- ऑटो चालक सवारियों की सुन ही नहीं रहे।
- ट्रैफिक पुलिस भी इस ओर से विमुख है।
- ऑटो को सेनिटाइज भी नहीं किया जाता है।
- ड्राइविंग सीट व अतिरिक्त पटिया लगाकर सवारियाँ बैठाई जा रही हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/there-is-no-fear-of-auto-corona-running-with-riders-127732678.html
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