बाबाटोला निवासी 60 वर्षीय वृद्धा कोरोना संदिग्ध होने पर मेडिकल के वार्ड नंबर तीन में शनिवार को भर्ती हुई थीं। रविवार को अस्पताल से उनके बेटे के पास फोन पर सूचना दी जाती है कि उनकी मृत्यु हो गई है, शव लेने की कार्यवाही करने मेडिकल आ जाएँ। इस सूचना से परिवार शोक में डूब गया, खबर मिलने पर रिश्तेदार भी आने लगे। दो घंटे बाद फिर फोन पहुँचता है कि चिंता न करें, माताजी जीवित हैं, हालत थोड़ी सीरियस है। मेडिकल में इस तरह की चूक या लापरवाही ने एक परिवार को जबरदस्त मानसिक तनाव में पहुँचा दिया था।
यह है मामला | बाबाटोला निवासी सुरेश चक्रवर्ती ने बताया कि उनकी माँ को कमर में तकलीफ होने पर संजीवनी अस्पताल में भर्ती किया गया था, वहाँ उन्हें साँस लेने में दिक्कत होने पर सीटी चेस्ट कराने पर चिकित्सकों ने फेफेड़ों में संक्रमण बताते हुए मेडिकल या विक्टोरिया ले जाने कहा। शनिवार को उन्हें मेडिकल के वार्ड नंबर 3 में भर्ती किया गया। रविवार की दोपहर अस्पताल से किसी मैडम का फोन आया कि माँ का निधन हो गया है, आगे की कार्यवाही के लिए आ जाएँ। यह खबर पूरे परिवार के लिए वज्रपात जैसी थी, घर में रोना पीटना मच गया। दो घंटे बाद किसी पुरुष का फोन आया कि चिंता की बात नहीं है, माताजी रिकवर हो गई हैं, हालत गंभीर है हम इलाज कर रहे हैं।
अस्पताल पहुँचे तो बहाना बनाया
सुरेश कुछ परिजनों के साथ मेडिकल पहुँचे तो उन्हें बताया गया कि साँस बंद हो गई थी, पम्पिंग करने पर स्थिति सँभल गई। इस बात का जवाब कोई नहीं दे सका कि सब प्रयास करने के बाद ही ऐसी खबर दी जाती है, तो पहले क्यों दी? वार्ड में पॉजिटिव व सस्पेक्ट दोनों मरीज हैं, वहाँ किसी परिजन को जाने की इजाजत नहीं है, फिर भी माँ से मिलने की जिद करने पर सुरेश को पीपीई किट पहनाकर अंदर जाने स्वीकृति दी गई। इस संबंध में वार्ड प्रभारी डॉ. दीपक वरकड़े से सम्पर्क का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।पी-2
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/reported-the-death-of-the-old-woman-to-the-family-after-two-hours-said-dont-worry-alive-127738991.html
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