Tuesday, August 4, 2020

तीन युवाओं ने सफलता हासिल कर इलाके का बढ़ाया मान

यूपीएससी में सफलता प्राप्त करने वाले युवाओं में इस बार बुंदेलखंड भी बुलंदी पर रहा। इलाके से तीन युवाओं ने यूपीएससी में बेहतर रैंकिंग के साथ क्षेत्र का परचम फहराया। एक ने पहली ही बार में सफलता अर्जित की तो दूसरे ने बिना कोचिंग के मुकाम पा लिया। तीसरा किसान का बेटा है जो अभावों के बावजूद अपनी मंजिल हासिल करने के इरादे से तनिक भी नहीं डिगा।

मुंबई में 18 लाख की नौकरी छोड़ी पहले प्रयास में सफलता

फर्स्ट अटैम्प्ट में ही सफलता मिली। पिता पीआईयू में अधीक्षण यंत्री हैं। आईआईटी खड़गपुर से बीटेक हैं। कैंपस सिलेक्शन के बाद मुंबई के जेपी मार्गन में नौकरी की। 2018 में नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी शुरू की। जेपी मार्गन में उनका 18 लाख रुपए का पैकेज था। दो साल यहां नौकरी की। यूपीएससी में टॉप विद्यार्थियों के नोट्स से तैयारी की। दिल्ली में इंटरव्यू के लिए क्लास ज्वॉइन की।

बगैर कोचिंग सेल्फ स्टडी कर एग्जाम दिया, पहले सात अंक से चूके थे

यह दूसरा अटैम्पट है। 2018 में सिर्फ 7 अंक से चूक गए थे। दिल्ली में रहकर ही तैयारी कर रहे थे। बीएचयू-आईआईटी से 2015 में एमटैक पासआउट हैं। एमएनसी में नौकरी कर चुके हैं। सिविल सर्विसेज के लिए 2017 में नौकरी छोड़ दी। बगैर कोचिंग सेल्फ स्टडी कर एक्जाम दिया। पिता स्कूल प्राचार्य और मां वकील हैं। वैभव कहते हैं कि आईएएस नहीं मिलता है तो दोबारा एक्जाम देंगे। बुंदेलखंड में बेरोजगारी खत्म करना चाहते हैं।

पिता की कैंसर पर जीत तो बेटा यूपीएससी में फतह, आर्थिक हालत थी कमजोर

उपकाशी हटा के समीपस्थ ग्राम डौली के संदीप पटेल ने यूपीएससी की परीक्षा में 464 वीं रैंक हासिल कर मातृभूमि का मान बढ़ाया है। उनके पिता किसान हैं। पिता दीपनारायण पटेल को कृषि से कोई खास मदद नहीं होने और गले का कैंसर होने से उनकी माली हालत खराब थी, लेकिन दीपनारायण ने संदीप को पढ़ाई के लिए उसके मामा के यहां पवई भेज दिया था। जहां से कक्षा 12वीं की परीक्षा के बाद एक टेस्ट में हासिल विशेष दक्षता के चलते दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेकर वहीं से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। 1 अगस्त 98 को जन्मे संदीप के घर में उसकी एक बहन है और अब पिता की तबियत भी ठीक रहती है। माता उर्मिला सहित पूरे परिवार की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। स्वयं संदीप ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया है जिन्होंने अपनी तबियत की चिंता किए बिना भी उसे पढ़ने देने की रजामंदी देते हुए संघर्ष के लिए प्रेरित किया। संदीप ने विपरीत परस्थितियों में अध्ययन करते हुए आगे बढ़ने का संकल्प लिया जिसमें उनके परिवार ने भी पूरा साथ दिया। आर्थिक स्थिति कमजोर थी पर हार नहीं मानी।



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Three youths succeeded and increased the value of the area


source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/news/three-youths-succeeded-and-increased-the-value-of-the-area-127586508.html

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