जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर ग्राम टुकराना में 200 वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन कर रहे है। यहां के ग्रामीण बारिश शुरू होते ही हर घर से अनाज इकट्ठा करते हैं। इकट्ठा अनाज को बाजार में बेचकर उससे ज्वार खरीदकर लाते हैं तथा बुधवार को पक्षियों को खिलाते हैं ताकि बारिश के समय में पक्षियों को खाने में परेशानी ना आए। गेहूं के बजाए ज्वार को ग्रामीण पक्षियों के लिए अच्छा भोजन मानते हैं इसलिए गेहूं बेचकर ज्वार खरीदा जाता है। पक्षियों को दाना खिलाने का कार्य जुलाई से सितंबर तक प्रतिदिन किया जाता है। गांव के मुख्य चौराहे स्थित प्राचीन मां दुर्गा मंदिर के प्रांगण में अलसुबह से ही पक्षियों का झुंड दाना खाने के लिए आने लगता है। जहां पक्षी मेहमान की तरह आते हैं और भोजन करते हैं।
गांव के बद्री पटेल बताते हैं कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इसका पालन हर वर्ष होता है। श्रावण शुरू होते ही पक्षियों को दाने डालना शुरू कर देते हैं। जब तक फसल में अनाज ना आ जाए तब तक पक्षियों के लिए गांव में यही व्यवस्था रहती है। यह काम हमारे पूर्वजों द्वारा भी किया गया है।
पहले पिता डालते थे पक्षियों को दाना अब बेटे ने संभाली कमान-
अनाज इकट्ठा कर स्वर्गीय मांगीलाल गामी मंदिर की छत पर दाना डालते थे। गांव के नारायण प्रसाद पटेल, बाबूलाल कबाड़ी ने बताया अब उनके बेटे हरिओम गामी रोज सुबह जल्दी उठकर मंदिर की छत पर पक्षियों काे दाना डालने का काम कर रहे हैं।
अब हर सप्ताह दे देते हैं इकट्ठा अनाज- हरिओम गामी बताते हैं कि 5 साल पहले प्रतिदिन बारिश के दिनों में अनाज इकट्ठा किया जाता था पर अब गांव वाले स्वयं ही 1 सप्ताह 2 सप्ताह का इकट्ठा अनाज पक्षियों को खिलाने के लिए दे देते हैं जिसे ज्वार में बदलकर खिलाया जाता है। पहले पक्षियों को 1 किलो अनाज बहुत होता था अब 5 किलो तक प्रतिदिन पक्षी ज्वार खा जाते हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/shajapur/news/villagers-arrange-grain-from-every-house-by-collecting-grains-127579951.html
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