सांप का नाम सुनकर डर के मारे लोगों में अफरा तफरी मच जाती है। परंतु कोटेश्वर तीर्थ के पुजारी कपिल गोस्वामी निसरपुर बसाहट के सांपों और बिच्छू के मित्र कहे जाते हैं। लाेग सांप काे मारे नहीं इसलिए एक सूचना पर पहुंच जाते हैं अाैर लकड़ी की मदद से सांप काे पकड़ कर जंगल में छाेड़ देते हैं। अब तक कोटेश्वर, निसरपुर, कुक्षी, नानपुर, कड़माल सहित एक दर्जन से ज्यादा गांवों में जाकर 4 हजार से ज्यादा सांपों को पकड़ चुके हैं।
32 वर्षीय गोस्वामी ने बताया 6 वर्ष की उम्र से सांपों को पकड़ रहा हूं। बीएससी फाइनल कर वर्तमान में कोटेश्वर महादेव मंदिर में पुजारी हूं। सांप पर्यावरण का महत्वपूर्ण अंग हैं। इन्हें लाेग मारे नहीं इसलिए सूचना मिलते ही खुद के खर्च से पहुंच कर सांप को पकड़कर सुरक्षित जगह पर छोड़ देता हूं।
अब तक 4000 से भी अधिक सांपों को पकड़कर सुरक्षित जगह छाेड़ चुका हूं। वर्ष 2019 में कोठड़ा के एक किसान सुखदेव भोलू के खेत से 13 फीट लंबा अजगर पकड़कर वन विभाग कुक्षी के सुपुर्द किया था। अभी तक जो सांप रेस्क्यू किए है उनमें सबसे वेनेमस (जहरीले) सांप में कोमन करेत, स्पेक्टीकल कोबरा, रसल वाइपर (घोनस), बेनडेड करेत (राज सांप), ग्रीन पिट वाइपर (हरा लता सांप) के साथ ही नोन वेनेमस बगैर जहर वाले सांप रेट स्नेक्स (घोड़ा पछाड़), रसल सेंड बोआ (दो मुंहा सांप), सेंड बोआ, कोमन वूलफ, कूकरी स्नेक्स, ग्रीन वाईन (घास सांप) हैं। इनमें ज्यादातर कोबरा प्रजाति के सांपों का रेस्क्यू किया है।
3 बार काट चुके हैं सांप
गाेस्वामी ने बताया सांप पकड़ने के दौरान अलग-अलग जगहों पर तीन सांपों ने काट चुके हैं। इनमें मध्यम जहर वाला ग्रीन पिट वाइपर ने पहली बार 2011 में बाइट किया था। बगैर जहर वाला कोमन वूलफ स्नेक्स 2018 अाैर 2019 में रेस्क्यू करते समय बाइट किया था। गोस्वामी कहते है ये गॉड गिफ्ट है कि बचपन से ही बिना उपकरण के लकड़ी के सहारे ही सांपों को पकड़ लेता हूं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/jhabua/news/on-a-call-the-snakes-arrive-at-their-own-expense-127583150.html
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