प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण वहाँ पर कोरोना संक्रमण आसानी से फैलने की आशंका जताते हुए दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कहा- बंदियों की रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर काफी कुछ किया जा रहा, परंतु अपराधियों को एकदम से जेल के बाहर नहीं किया जा सकता। उसके लिए एक तय न्यायिक प्रक्रिया है। इस मुद््दे से पहले खुद को भोपाल की समाजसेविका बताने वालीं याचिकाकर्ता ये बताएँ कि लॉकडाउन में उन्होंने कितने कोविड-19 मरीजों की देखभाल की और इस दौरान उन्होंने संक्रमित मरीजों के लिए क्या-क्या कदम उठाए? इन बिन्दुओं पर युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को 18 अगस्त तक विस्तृत जानकारी पेश करने कहा है।मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान भोपाल के तुलसी नगर में रहने वाली माधुरी कृष्णास्वामी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र उदय सिंह, अधिवक्ता भाविल पाण्डे, निकिता सोनवाने व अदिती प्रधान और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेन्द्र यादव हाजिर हुए।
अनलॉक-3 में निजी ऑपरेटरों द्वारा बसों का संचालन न करने को चुनौती
एक अन्य जनहित याचिका पर सीजे की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने केन्द्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने कहा है। बैतूल के डॉ. कृष्णा मोदी और भोपाल की समाजसेविका सुशीला शर्मा की ओर से दायर इस याचिका में अनलॉक-3 की अवधि शुरू होने के बाद भी प्रदेश में निजी ऑपरेटरों द्वारा बसों का संचालन न किए जाने को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ऐसा न होने से यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अशोक श्रीवास्तव व स्वप्निल खरे का पक्ष सुनने के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को जवाब पेश करने के निर्देश देकर अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की है।
महिला अधिकारी के तबादले पर सशर्त रोक
जस्टिस नंदिता दुबे की एकलपीठ ने सागर जिले की देवरी ब्लॉक में पदस्थ कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी चारू जैन के दस माह के भीतर 23 जुलाई 2020 को रहली गढ़ाकोटा किए गए तबादले पर सशर्त रोक लगा दी है। अदालत ने मामले का निराकरण करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा तबादले के खिलाफ दिए गए आवेदन का निराकरण होने तक आवेदक के ट्रांसफर पर रोक रहेगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से उक्त तबादले को नीति विरुद्ध बताते हुए कहा गया कि कोरोना काल में ऐसा किया जाना अनुचित है। आवेदक की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र ज्योतिषी व विकास मिश्रा ने पैरवी की। पी-4
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