कोरोना काल में प्रदेशभर के कॉलेजों में परीक्षाएं तय नहीं। यूजीजी से लेकर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग और डीएवीवी ने अब तक कोई शेड्यूल जारी नहीं किया। इसके बावजूद प्रेस्टीज कॉलेज ने अपने 13 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों से परीक्षा फाॅर्म भरवाए बिना ही फीस वसूल ली। हर विद्यार्थी से 2200 रुपए के हिसाब से फीस ली गई। इस लिहाज से 2 करोड़ 86 लाख रुपए वसूल लिए। इतना ही नहीं कॉलेज प्रबंधन विद्यार्थियों से बस फीस भी ली, जबकि कोरोना के कारण बसें चल ही नहीं रही हैं।
इंस्टिट्यूट से एलएलबी की पढ़ाई कर रहे प्रक्षल जैन, प्रियांशु जैन और निशांत कुमार ने बताया कि अकेले प्रेस्टीज लॉ इंस्टिट्यूट के 830 विद्यार्थियों से 2200 रुपए के हिसाब से एडवांस परीक्षा फीस के नाम पर पेटीएम अकाउंट में जमा करवा लिए गए। फीस के साथ विद्यार्थियों से कोई फाॅर्म भी नहीं भरवाया गया है। उन्हें कहा गया आने वाले समय में परीक्षा की जैसी स्थिति बनेगी, उसके मुताबिक निर्णय लिया जाएगा।
विद्यार्थियों से बस की फीस भी ले ली
प्रेस्टीज ग्रुप के सभी स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थयों से ड्राइवर-कंडक्टर का वेतन देने और बसों का खर्चा निकालने के लिए बस फीस ली गई है। ड्राइवर लखन परमार, शिव कचोले और रानू शुक्ला के मुताबिक, शहर के सभी रूटों की बसें चलाने के लिए तैनात किए गए कर्मचारियों का वेतन इंस्टिट्यूट के पास एडवांस जमा है। इसके बावजूद आधे से ज्यादा ड्राइवर और कंडक्टरों को नौकरी से निकाल दिया है। जो लोग अब भी नौकरी में हैं, उन्हें वेतन काटकर दिया जा रहा है।
अंतिम वर्ष की परीक्षा होगी, बाकी का रिजल्ट और मार्कशीट तो बनेगी : डायरेक्टर
प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट की डायरेक्टर योगेश्वरी पाठक का कहना है कि अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा होना है। बाकी कक्षाओं के लिए रिजल्ट और मार्कशीट बनाने का काम होगा इसलिए उनकी परीक्षा फीस ली है। हमने तो परीक्षा लेने की पूरी तैयारी कर ली थी। उसमें भी तो खर्च हुआ है। हमें यूनिवर्सिटी को भी तो कुछ हिस्सा देना है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/examination-not-fixed-prestige-college-recovered-286-crore-in-the-name-of-fees-from-students-127660092.html
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