प्रदेश के शराब ठेकों से संबंधित 44 मामलों पर हाईकोर्ट में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। ठेकेदारों की ओर से लगातार दलील दी जा रही है कि उन्होंने अनुबंध पर दस्तखत ही नहीं किए, इसलिए वे लाइसेन्सी की परिभाषा में नहीं आते। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि एक बार निविदा स्वीकार हो जाने के बाद ठेकेदार पीछे नहीं हट सकते, क्योंकि वे लाइसेन्सी की परिभाषा में आ जाते हैं। साथ ही सरकार को कभी भी निविदा की शर्तों में बदलाव करने का अधिकार होता है। शर्तों में यह भी स्पष्ट था कि किसी भी परिस्थिति में यदि कोई भी नुकसान होगा तो उसकी भरपाई खुद ठेकेदारों को करनी होगी, सरकार उसके लिए कुछ नहीं करेगी। सरकार की ओर से दलीलें पूरी होने के बाद चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता, महाधिवक्ता पुरुषेन्द्र कौरव, अतिरिक्त महाधिवक्ता सौरभ मिश्रा, पुष्पेन्द्र यादव ने पक्ष रखा। याचिका में संशोधन और याचिका के लंबित रहने के दौरान हुए कुछ नए घटनाक्रमों को लेकर दायर अर्जियाँ स्वीकार करते हुए युगलपीठ ने याचिकाकर्ता ठेकेदारों की ओर से पक्ष रखने के लिए सुनवाई बुधवार को निर्धारित की।
आयोगों में नियुक्तियों के मामलों पर सुनवाई 15 दिनों के लिए टली
कमलनाथ सरकार द्वारा विभिन्न आयोगों में की गईं नियुक्तियों को शिवराज सरकार द्वारा रद््द करने के खिलाफ दायर मामलों पर जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने सुनवाई 15 दिनों के बाद करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को अदालत ने सभी पक्षों को कहा है कि वे अपनी-अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें, ताकि अगली सुनवाई पर इन मामलों पर सुनवाई हो सके। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके वर्मा ने पक्ष रखा।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/the-government-did-not-sign-the-contract-so-we-are-not-the-license-the-government-said-liquor-contractors-can-not-back-down-after-accepting-the-tender-127441790.html
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