Monday, May 4, 2020

मानव शरीर से जितना परोपकार हो जाए करना चाहिए

जब जब होय धर्म की हानि बाढ़इ असुर अधम अभिमानी तब तब धरि प्रभु विविध शरीरा हरहि कृपा निधि सज्जन पीड़ा। पृथ्वी पर जब-जब अधर्म बढ़ता हैं तब-तब मेरे प्रभु इस धरा पर अवतार धारण करते हैं। श्रीराम ने रावण को मारा, तब रावण के साथ उसका मैं (अहंकार) भी मर गया।
इसलिए अपने अभिमान को सबसे पहले मारना चाहिए। जिस घर में मन में अभिमान भरा हो वहां भगवान नहीं आते। वैशाख मास में कोरोना वायरस से मुक्ति के लिए नगर के कथावाचक चंद्रप्रकाश शास्त्री द्वारा अपने घर पर सात दिनी श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन के पांचवें दिन ऑनलाइन प्रसारण के माध्यम से यह बात श्रोताओं से कही। श्रद्धालु अपने-अपने घरो में ही मोबाइल से श्रीमद् भागवत कथा का आनंद ले रहे हैं। सोमवार को कथा के पांचवें दिन कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते हुए पंडित चंद्रप्रकाश शास्त्री ने कहा- कृष्ण जन्मोत्सव पर बाबा नंद ने बहुत दान दिया। बाबा नंद के यहां 9 लाख गाय थी। बाबा ने दो लाख गायों का दान दिया। अन्न धन भी खूब लुटाया। परमात्मा ने हमें दिया है तो इस महासंकट में हमें आगे आना चाहिए। वैश्विक महामारी कोरोना में हमे जितने भी जरुरतमंद लोग हैं उनकी मदद करना चाहिए। परोपकाराय शरीराणि इस मानव शरीर से जितना परोपकार हो जाए उतना करते रहना चाहिए। कथा समापन पर परिजनों ने आरती की।



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The human body should do as much benevolence


source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/badwah/news/the-human-body-should-do-as-much-benevolence-127270962.html

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