नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों को तो महीना शुरू होते ही वेतन मिल गया और वे खुशी से काम कर रहे हैं, लेकिन कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में जी-जान से जुटे जिन कर्मचारियों ने कई व्यवस्थाओं को सँभाला हुआ है उनके वेतन की चिंता किसी को नहीं है। ऐसी विकट स्थिति में भी दिन-रात अपने कार्य के साथ ईमानदारी करने वाले ऑपरेटर कोरोना फाइटर्स से कम नहीं हैं फिर भी इनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
नगर निगम के नियमित कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रतिमाह करीब 10 करोड़ का वेतन भुगतान होता है, वहीं आउटसोर्स पर रखे गए 270 से अधिक कर्मचारियों को 40 लाख रुपए वेतन के रूप में दिया जाता है, जिसमें पीएफ की राशि भी शामिल होती है उसके लिए निगम अधिकारी दस बार सोचते हैं, जबकि हकीकत यह है कि इन दिनों नगर निगम में अधिकारी और कर्मचारी काम पर न आने के बहाने तलाश रहे हैं, 55 साल से ऊपर के अनेक अधिकारी गायब हैं, कर्मचारियों को तो वैसे भी लाभ है क्योंकि सरकार का ही नियम है कि 30 फीसदी कर्मचारी काम पर हाजिर हों। ऐसे में आउटसोर्स के कर्मचारी ही अधिकांश काम सँभाल रहे हैं।पूरा कंट्रोल एंड कमांड सेंटर उन्हीं के भरोसे चल रहा है, यहाँ लगभग 80 कर्मचारी 3 पालियों में काम रहे हैं, इसके अलावा बहुत से कर्मचारी जोनों में भोजन व्यवस्था सँभाल रहे हैं। कोई सब्जी मंडी का जिम्मा सँभाले हुए है तो कोई सेनिटाइजेशन में जुटा है, अनेक कर्मचारी अतिक्रमण विभाग में भी लगाए गए थे उन्हें अब मजदूरों की सूची बनाने का जिम्मा दिया गया है तो किसी से वाहन चलवाए जा रहे हैं। कई कर्मचारियों ने कहा कि सर वैसे भी हमारी पेमेंट बहुत अधिक नहीं है और हम लगातार काम पर आ रहे हैं जिससे पेट्रोल भी लग रहा है ऐसे में वेतन न मिलने से बड़ी परेशानी हो रही है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/officers-take-payment-bring-corona-fighters-of-command-center-127296379.html
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