आलमपुर के ग्राम पंचायत रुरई में बाहरी मजदूरों को रोकने के लिए सरकारी स्कूल में क्वारेंटाइन सेंटर बनाया गया है। जिसकी जिम्मेदारी जनपद पंचायत के माध्यम से सचिव अजीत सिंह चौहान को सौंपी है, लेकिन सेंटर में एक भी बाहरी व्यक्ति नहीं ठहर पाता है। जिसकी वजह है कि सचिव द्वारा उनके खाने पीने का इंतजाम ही नहीं किया जाता है। इसलिए लोग मजबूरी में एक से दो दिन तो जैसे तैसे काट लेते हैं फिर सुविधाएं न मिलने के कारण अपने अपने घर चले जाते हैं।
बुधवार को रामअवतार सिंह अपनी पत्नी बबतीता और दो बच्चों के साथ जयपुर से आए थे। जांच कराने के बाद सभी लोगों को क्वारेंटाइन सेंटर में 14 दिन रहने के लिए भेज दिया। दिन भर सचिव देखने नहीं आया और न हीं भोजन के लिए किसी ने पूछा। बबीता ने बताया कि जो खाना लेकर आए थे वह रास्ते में खा लिया। बच्चे को भूख लगी तो उसे बिस्कुट खिलाकर सुला दिया है, लेकिन हम दोनों भूखे हैं। स्थिति यह हुई कि रात में दंपति बिना भोजन किए ही भूखे पेट सो गए। जेब में पैसे इतने नहीं थे कि कहीं से कुछ मंगा भी लेते। सुबह जब स्कूल के प्राचार्य अरुण त्रिपाठी विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंचे तो उन्होंने अपनी तरफ से पांच सौ रुपए की मदद दी।
12 लोग जा चुके हैं क्वारेंटाइन छोड़कर: अभी तक क्वारेंटाइन सेंटर में 12 लोग ठहरने के लिए आए थे, जो एक से दो दिन तो रुके, लेकिन पंचायत सचिव द्वारा उनके खाने पीने का इंतजाम नहीं किया गया तो वह बेवसी में अपने घर चले गए। दो दिन पहले भी तीन लाेग आए थे उन्हें जब खाना नहीं मिला तो वह भी होम क्वारेंटाइन में रहने के लिए चले गए हैं। इससे पहले भी कई लोग जो बाहर से आए थे जिन्हें चेकअप के बाद स्वास्थ्य विभाग ने क्वारेंटाइन सेंटर में भेजा था वह 14 दिन रहने की बजाय एक या दो दिन बाद ही अपने अपने घर चले गए हैं। इस संबंध में ग्रामीणों ने पंचायत सचिव की जनपद सीईओ से लेकर कलेक्टर तक शिकायत की है, लेकिन सचिव ने सेंटर में ठहरने वाले लोगों के लिए सुविधाएं मुहैया नहीं कराई हैं।
मेहगांव में पंचायत स्तर पर बने सेंटर खाली
मेहगांव में कुल 104 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें पंचायत स्तर पर प्रशासन ने क्वारेंटाइन सेंटर बनाकर सरपंच व सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी है। इसकी देखरेख जनपद पंचायत सीईओ बलवीर सिंह कुशवाह के हाथों में है, लेकिन स्थिति यह है कि पंचायत स्तर पर कुछेक को छोड़ दिया जाए तो सभी क्वारेंटाइन सेंटर खाली पड़े हैं। मगर मजे की बाज यह है कि सचिव व सीईओ द्वारा शासन का बजट हड़पने के लिए प्रत्येक सेंटर में 20 लोगों को कागजों में दर्शाया जा रहा है। जिसकी जांच कर प्रशासन को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित करनी चाहिए।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/bhind/news/quarantined-people-are-neither-getting-food-nor-water-they-are-not-even-paying-attention-127327587.html
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