कोरोना वाॅरियर के रूप में काम करने वाली ऐसी मां भी हैं जिनके बच्चे छोटे होने के बावजूद वे दूसरों की जान बचाने और संक्रमण से लड़ाई में जुटी हैं। इनमें से कुछ की ड्यूटी में सर्वे में तो कुछ की मॉनीटरिंग में लगाई गई है। जानिए ऐसी ही तीन मां की कहानी...
बेटे को दिनभर नहीं करा पाती फीडिंग
प्रियंका खरे, सुपरवाइजर, महिला एवं बाल विकास कार्यरत हैं। वहबताती हैं कि, लॉकडाउन में रेपिड रिस्पांस टीम में ड्यूटी लगी है। मेरा पूरा इलाका कटेंनमेंट है। सुबह से ड्यूटी पर निकल जाती हूं। मेरा काम कंटेनमेंट में टीम को मॉनिटर करना है। दोपहर को ड्यूटी से लौटकर 7 माह के बेटे को देखने आती हूं लेकिन उसे फीड नहीं करा पाती। कई बार पति को भी ड्यूटी जाना पड़ता है तब अपनी 10 साल की बेटी और 7 माह के बेटे को पड़ोसी के घर छोड़कर जाती हूं।
बच्चे को गोद में लेने से डर लगता है

अनामिका पटेल, सुपरवाइजर हैं, उनकहा है कि मेरा नौ माह का बेटा है। अपनी बेटी और पति के सहारे ही उसे छोड़कर ड्यूटी पर जाती हूं। घर लौटती हूं तो देखकर पास आने की कोशिश करता है लेकिन मैं उसे नहीं ले पाती। कोरोना संक्रमण वाले इलाके में ड्यूटी करने के बाद जब तक नहा न लूं, तब तक उसे टच तक नहीं करती हूं। केवल उससे बातें करती हूं। बेटा पास आने और फीडिंग के लिए जिद करता है देखकर रोता है लेकिन उसे कैसे बताऊं कि उसकी मां के लिए ड्यूटी भी जरूरी है।
एक घर में रहकर भी बेटियों से दूर

भावना पटैया, नर्स, हमीदिया अस्पताल में कार्यरत हैं। वह बताती हैं किइमरजेंसी यूनिट के मेडिकल वार्ड में ड्यूटी कर रही थी, मुझे आशंका थी कि किसी भी दिन काेराेना का संक्रमण हाे सकता है। इसी कारण ड्यूटी के बाद घर जाकर खुद काे अलग कमरे में अाइसाेलेट करके रखती थी। 15 दिन से ज्यादा बीत गए, एक ही घर में रहकर 8 साल और 4 साल की बेटियों का मुंह नहीं देखा। 4 मई काे काेराेना जांच के लिए सैंपल िदया था। 7 काे रिपाेर्ट पाॅजिटिव अाई, अब चिरायु में इलाज चल रहा हूं। अच्छी बात यह रही कि बेटियाें से दूरी बनाकर रखी थी।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/bhopal/news/with-mamta-duty-is-also-necessary-therefore-this-mother-leaving-her-children-at-home-and-performing-corona-duty-127287325.html
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