काेराेना संदिग्ध मरीज सैंपल की रिपाेर्ट नहीं मिलने से परेशान हैं। वे न सिर्फ अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं बल्कि स्मार्ट सिटी के कंट्रोल कमांड सेंटर में वीडियो कॉल कर बार-बार पूछताछ कर रहे हैं। दरअसल, प्रशासन ने संदिग्धाें तक उनके सैंपल की रिपाेर्ट समय पर पहुंचाने के लिए काेई व्यवस्था नहीं बनाई है। जिले में अभी तक 1092 लोगों के सैंपल लिए गए हैं। इनमें से सिर्फ 6 पॉजिटिव मरीजों के नाम सामने आए हैं। शेष संदिग्धों के नाम सामने नहीं आ पाए हैं। ऐसे मरीजों का कहना है कि प्रशासन के पास हमारे मोबाइल नंबर हैं। यदि हमारी रिपोर्ट वाट्सएप या मैसेज से हमें दी जाए ताे बेहतर हाेगा। इससे न सिर्फ हमारे ऊपर मानसिक दबाव कम होगा बल्कि बार-बार पूछताछ नहीं करनी पड़ेगी।
ऐसे समझें लाेगाें की परेशानी
अभी तक 849 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। इनमें 92 ऐसे संदिग्ध हैं, जिनकी जांच आवश्यक नहीं थी। इस कारण उनके सैंपल रिजेक्ट कर दिए गए। जबकि 145 ऐसे मरीज हैं, जिनकी रिपोर्ट परीक्षण के उपरांत अप्राप्त है। अब इन सभी मरीजों को अपनी रिपोर्ट का इंतजार है। क्योंकि उन्हें नहीं पता कि उक्त तीनों कैटेगरी में उनका नाम कहां शामिल हैं, इस कारण वे अपने परिजनों से दूर बने हुए हैं।
आपदा नियंत्रण केंद्र से लाइव
- महलगांव स्थित कर्मचारी आवास में रहने वाले शिववरण सिंह राजावत जेएएच तक रिपोर्ट के लिए चक्कर काट चुके हैं। वहां उनका मोबाइल नंबर लिख लिया है, लेकिन रिपाेर्ट नहीं भेजी गई। शनिवार को श्री राजावत ने वीडियाे कॉल कर पूछा रिपोर्ट कैसी आई? डाूक्टरों की टीम ने कहा कि पता करके बताते हैं। शाम को जानकारी दी गई कि रिपोर्ट निगेटिव है, तब घर में सभी के चेहरे खिले।
- नाका चंद्रबदनी में रहने वाले सुनील सेन का कहना है कि 8 अप्रैल को मेरा सैंपल लिया गया था, लेकिन 16 अप्रैल तक रिपोर्ट नहीं आई। एेसे में मैं और परिजन टेंशन में थे। वीडियो कॉल किया, तब अगले दिन रिपाेर्ट निगेटिव अाने की जानकारी मिली। यदि मैसेज लोगों को पहुंचाकर रिपाेर्ट बता दी जाए ताे अच्छा रहेगा।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/there-is-no-arrangement-to-report-the-sample-to-the-patient-127195231.html
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