Sunday, April 19, 2020

गारमेंट उद्योग की कमर टूटी, अब आजीविका का संकट

कोरोना वायरस के कारण लागू किए गए लॉकडाउन से सबसे अधिक नुकसान अगर किसी उद्योग को हुआ है तो वह गारमेंट उद्योग। ग्वालियर में दो से तीन कमरों में असंगठित रूप से करीब 250 फैक्टरियां इस क्षेत्र में काम करती हैं। इनका सालाना टर्नओवर करीब 500 करोड़ रुपए है लेकिन लॉकडाउन की वजह से इस पूरे उद्योग की कमर ही टूट गई है।
मार्च से लेकर जून तक के शादियों के सीजन को लेकर कई कारोबारियों ने 100 करोड़ रुपए का कारोबार करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन अचानक से आए कोरोना संकट और फिर लॉकडाउन के कारण सैकड़ों कारोबारियों की पूंजी फंस गई है। इन कारोबारियों के माल का अब कोई खरीदार नहीं है और आने वाले कई महीनों तक खरीदार मिलने की उम्मीद भी नहीं है, बाजार के जानकारों ने आशंका जताई है कि लॉकडाउन खुल भी जाता है तो भी गारमेंट कारोबार नहीं खुलेगा। अगला एक साल इस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।

छोटे कारोबारी आजीविका चलाने उधार मांग रहे, पूंजी का संकट
ग्वालियर गारमेंट एसोसिएशन के सचिव अशोक चावला बताते हैं कि बाजार में न डिमांड है और न ही नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। जो माल पहले से ही बनाकर या मंगाकर रख लिया है, उसका डंप होना निश्चित हो गया है। ऐसे में जो छोटे कारोबारी हैं, जो दो से तीन कमरों में अपनी गारमेंट फैक्टरी चला रहे थे, उनके लिए बड़ा संकट है। हालात यहां तक आ गए हैं कि कई छोटे कारोबारी आजीविका चलाने अब उधार मांग रहे हैं। श्री चावला बताते हैं कि इस इंडस्ट्री में ग्वालियर का रोल बड़ा महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि ग्वालियर से दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तरप्रदेश सहित नॉर्थ इंडिया में अधिकतर जगहों पर माल जाता रहा है।

रेडिमेड गारमेंट पार्क के शुरू होने की उम्मीद नहीं
एमपी आईडीसी ने 20 करोड़ रुपए खर्च कर 4 हजार लोगों को रोजगार देने के लिए हजीरा थाने के पास रेडिमेड गारमेंट पार्क बनवाया था, लेकिन कभी विकास शुल्क अधिक होने तो कभी कलेक्टर गाइडलाइन से ज्यादा की जमीन होने का मुद्दा बनाकर कारोबारियों ने यहां प्लॉट नहीं लिए, लेकिन अब तो गारमेंट कारोबारियों के सामने आजीविका चलाने का संकट आ गया है तो ऐसे में यहां 50 लाख से 1 करोड़ रुपए तक इंवेस्टमेंट कर फैक्टरी लगाने की उम्मीद कारोबारियों की ओर से न के बराबर है।

यह सीजन गया, दीपावली के बाद भी शुभ लग्न कम
शादी के सीजन के हिसाब से गारमेंट कारोबारियों ने करीब 100 करोड़ रुपए के व्यापार के लिए ऑर्डर, बुकिंग और माल फरवरी में ही उपलब्ध करा लिया था। लेकिन अब तो शादियां ही अधिकतर कैंसिल कर दी गई हैं। जिन लोगों ने ऑर्डर दिए थे, उन्होंने वे ऑर्डर निरस्त कर दिए और बाजार में आने वाले ग्राहकों की उम्मीद में जिन्होंने रेडिमेड कपड़ों का स्टॉक भर लिया था, उन्हें भी बड़ा नुकसान हो गया है। अब दीपावली के बाद भी शुभ लग्न बेहद कम हैं। यानी शादियां कम होंगी, ऐसे में इस इंडस्ट्री को ऑर्डर कम ही मिलेंगे।



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The garment industry's back is broken, now the livelihood crisis


source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/the-garment-industrys-back-is-broken-now-the-livelihood-crisis-127201778.html

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