जिस तरह राजधानी के प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों को कोविड-19 डेडिकेटेड हॉस्पिटल में तब्दील किए बिना आइसोलेटेड वार्ड और आईसीयू आरक्षित करने और इलाज के लिए अधिकृत किया जा रहा है, ऐसे में मामूली चूक भी संक्रमण का विस्फोट कर सकती है।
दिल्ली के अग्रसेन हॉस्पिटल, मुंबई के वॉकहार्ट और भाटिया हॉस्पिटल समेत देशभर में ऐसे 6 अस्पतालों में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन अस्पतालों में कोरोना मरीजों से नर्सिंग स्टाफ के संक्रमित होने के बाद कई डॉक्टर, मरीज और अन्य स्टाफ में संक्रमण का खतरा पैदा होने के बाद इन्हें खाली कराकर सील कर दिया गया है। भोपाल में भी जिन अस्पतालों को कोविड-19 के इलाज के लिए आरक्षित और अधिकृत किया गया है, उनमें अन्य बीमारियों के मरीजों का इलाज पहले से जारी है, एेसे में कोरोना संदिग्ध या पॉजिटिव मरीजों को यहां लाने या इलाज के दौरान किसी को भी संक्रमण होने की आशंका खड़ी हो गई है।
क्यों जरूरी है कोविड-19 डेडिकेटेड हॉस्पिटल
मुंबई के वॉकहार्ट अस्पताल को 7 अप्रैल को खाली कराते हुए सील किया गया है। यहां की 45 नर्स, 3 डॉक्टर समेत कुल 54 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, इसके अलावा 150 कर्मचारी और यहां इलाज और अन्य काम से आने वाले 250 लोगों को क्वारेंटाइन होने और जल्द से जल्द टेस्ट कराने को कहा गया है। ऐसा ही हाल दिल्ली के अग्रसेन हॉस्पिटल का भी हो गया था, जिसे 9 अप्रैल को सील किया गया है।
आपातकालीन व्यवस्था के लिए एहतियात जरूरी
डॉ. लोकेंद्र दवे, राज्य प्रभारी कोविड-19 हॉस्पिटल मैनेजमेंट, विभागाध्यक्ष के मुताबिक, जिन अस्पतालों में कोविड-19 के लिए अलग ब्लॉक और सेपरेट स्टाफ का इंतजाम हैं, उन्हीं में हमने कुछ मरीज भेजे हैं। हमारी प्लानिंग यही है कि सारे पॉजिटिव मरीज डेडिकेटेड हॉस्पिटल (चिरायु) में ही भेजे जाएं, लेकिन महामारी में अचानक कोई भी परिस्थिति निर्मित हो सकती है, ऐसे ऐहतियातन तैयारियां रखना जरूरी हैं।
हमने 19 सेपरेट ब्लॉक बनाए, कोई खतरा नहीं
डॉ. स्कंद त्रिवेदी, डायरेक्टर, बंसल हॉस्पिटल के मुताबिक, बंसल हॉस्पिटल में अभी कोरोना के 2 मरीज भर्ती हैं। पूर्व में भर्ती एक मरीज को चिरायु में ट्रांसफर कर दिया गया है। कोविड-19 के लिए हमने एक सेपरेट ब्लॉक बनाया है, उसकी लिफ्ट, आने-जाने का रास्ता और स्टाफ भी अलग है। सामान्य मरीजों के लिए फ्रंट गेट और कोविड के लिए पीछे से सेपरेट एंट्री रखी है। हमारे यहां संक्रमण का कोई खतरा नहीं हैं।
ये अस्पताल किए आरक्षित..
राजधानी में सरकारी अस्पतालों में एम्स, बीएमएचआरसी, हमीदिया, जेपी को कोविड-19 के लिए आरक्षित कर रखा है। प्राइवेट में आरकेडीएफ, पीपुल्स, बंसल, और नर्मदा हॉस्पिटल को भी आरक्षित किया गया है। चिरायु को कोविड-19 डेडिकेटेड हॉस्पिटल बनाया गया है।
गेट पर लगाया टेंट... ताकि बाहर से ही ले सकें संदिग्धों के सैंपल
जेपी अस्पताल आने वाले काेराेना के संदिग्ध मरीजाें के सैंपल लेने की व्यवस्था में बदलाव किया है। गेट नंबर दाे के पास परिसर में लगाए गए टेंट से ही सैंपल लिए जा सकेंगे। इस व्यवस्था की वजह- अस्पताल अाने वाले दूसरे मरीजाें काे इन संदिग्ध मरीजाें के संपर्क में अाने से बचाना है। दरअसल, अब तक यहां संदिग्ध मरीजाें के सैंपल पुरानी बिल्डिंग में स्थित अाइसाेलेशन वार्ड में ही लिए जा रहे थे, जबकि उक्त वार्ड अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग के अंदर है। हालांकि आइसाेलेशन वार्ड तक पहुंचने की व्यवस्था में दाे हफ्ते पहले बदलाव भी किया था। जेपी अस्पताल में काेराेना संिदग्ध करीब 50 मरीज राेज सैंपल देने पहुंचते हैं। ये वे मरीज हाेते हैं जाे या ताे एेसे किसी व्यक्ति से मिले हैं जिसने हाल के दिनाें में विदेश यात्रा की है या फिर किसी काेराेना पाॅजिटिव पाए गए व्यक्ति के संपर्क में आए हों। जेपी की िसविल सर्जन डाॅ. अलका परगनिया ने बताया कि इस व्यवस्था से दूसरे मरीज अाैर स्टाफ काे संक्रमण का खतरा न रहेगा।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/mp/bhopal/news/simultaneous-treatment-of-corona-suspects-and-patients-suffering-from-other-diseases-running-in-the-same-hospital-127157888.html
No comments:
Post a Comment