Saturday, March 7, 2020

सात साल में धान का रकबा पांच गुना बढ़ने और बारिश औसत पार न होने से 5 से 11 फीट गिरा भू-जल स्तर


सात साल में जिले का भू जल स्तर पांच से ग्यारह फीट तक गिर गया है। यह स्थायी गिरावट है। भू जलस्तर का जमकर दोहन होने और पानी बचाने के इंतजाम न होने के कारण यह स्थिति बनी। इन सात सालों में सरकारी स्तर पर लगभग 1500 से अधिक हैंडपंपों और करीब 400 से अधिक सिंचाई के लिए बोर का खनन हो चुका है। लेकिन बारिश के पानी को सहेजने के प्रयास नहीं किए गए। अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. देव नारायण शर्मा मानते हैं कि जिले में धान का रकबा बढ़ने से भू जल का दोहन अधिक हो रहा है। लोग बारिश के पानी को सहेज नहीं रहे। इसलिए भू जल स्तर में गिरावट हो रही है।

जिले के भू जल स्तर का लेखा जोखा रखने की जिम्मेदारी पीएचई विभाग के पास है। विभाग ने जिले की सीमाओं व केन्द्र के कुल 18 गांव को चिन्हित कर रखा है। इन गांवों के भू जल स्तर से ही बारिश के दौरान भू जल के रिचार्ज होने व उपयोग के बाद गिरने का आंकड़ा तय किया जाता है।

दो सबसे बड़े कारण... धान का रकबा बढ़ने और हैंडपंपों का लगातार खनन

1. सात साल में 5 गुना बढ़ा धान का रकबा: जिले में वर्ष 2013 में 8 हजार हेक्टेयर में धान की पैदावार की गई थी। जबकि वर्ष 2019 में किसानों ने 41 हजार 6 सौ हेक्टेयर में धान की पैदावार की। धान की फसल में खेतों का पानी से भरा रहना जरुरी है। बारिश कम होने की स्थिति में किसान बोरबेल के पानी का उपयोग करते हैं।

2. हैंडपंप व बोरवेल भी बढ़े: वर्ष 2013 में जिले में कुल 1131 किसानों के पास खेतों की सिंचाई के लिए बोरबेल के पानी की सुविधा थी। वर्ष 2019 में यह बढ़कर लगभग 17 सौ पर पहुंच गई। कुछ ऐसा ही हाल पीने के पानी के हैंडपंपों का है। वर्ष 2013 में जिले में लगभग 45 सौ हैंडपंप थे। वर्ष 2019 में इनकी संख्या 56 सौ को पार कर गई।

जिले के भू जल स्तर के लिए चिह्नित गांवों में कहां कितना गिरा (दिसंबर की स्थिति)

ब्लाक गांव वर्ष 2013 में वर्ष 2019 में

दतिया सलैया पमार 52 फीट 60 फीट

दतिया पठारी 50 फीट 60 फीट

दतिया काम्हर 50 फीट 60 फीट

दतिया चौपरा 50 फीट 60 फीट

दतिया उपरांय 52 फीट 50 फीट

दतिया गोविन्द नगर 55 फीट 60 फीट

दतिया सिरोल 82 फीट 90 फीट

दतिया सोनागिर 54 फीट 65 फीट

दतिया सुमाओली 56 फीट 65 फीट

दतिया विजयपुर 55 फीट 63 फीट

दतिया रामनगर 65 फीट 75 फीट

सेंवढ़ा खैरौना 52 फीट 60 फीट

सेंवढ़ा खैरीदेवता 35 फीट 40 फीट

सेंवढ़ा परसोदा गुजर 30 फीट 40 फीट

सेंवढ़ा परसोदा बामन 30 फीट 40 फीट

सेंवढ़ा कुदारी 30 फीट 40 फीट

भांडेर जौरी 30 फीट 40 फीट

भांडेर सेंथरी 30 फीट 40 फीट

बीते साल साल में बारिश के आंकड़ों पर एक नजर


वर्ष औसत बारिश

2013 891 मिमी

2014 1087 मिमी

2015 668 मिमी

2016 593 मिमी

2017 664 मिमी

2018 995 मिमी

2019 761 मिमी

( आंकड़े राजस्व विभाग में दर्ज )

धान में पानी का सबसे अधिक उपयोग, इसी फसल के लिए किसान सबसे ज्यादा करा रहे बाेर खनन

अयोध्या बस्ती में बरकीसराय में सूख गया हैंडपंप।

(पीएचई ने जिले के भू जल स्तर पर निगरानी के लिए जिले के 18 गांव चिह्नित कर रखे है। इन्हीं से जिले के भू जल स्तर का पता चलता है।)

कैसे सहेजा जा सकता है बारिश का पानी

शहर में मकानों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम व घरों से निकलने वाले गंदे पानी के लिए सोफ्ता गड्ढे बना कर। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों की मेड़बंधी, तालाबों व स्टॉप डैम के निर्माण कर बारिश के पानी को रोकने के इंतजाम हो तो बारिश का पानी जमीन में पहुंचे।



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Datia News - mp news groundwater level dropped 5 to 11 feet in seven years due to increase in paddy acreage five times and rainfall not crossing average


source https://www.bhaskar.com/mp/datia/news/mp-news-groundwater-level-dropped-5-to-11-feet-in-seven-years-due-to-increase-in-paddy-acreage-five-times-and-rainfall-not-crossing-average-070506-6801741.html

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