सड़क पर कई बार चार-चार बसों के खड़े हो जाने से लगता है जाम
जिले में नवीन गठित तहसीलों में स्थाई बस स्टैंड की सुविधा नहीं है। इस कारण स्थानीय रहवासियों को गर्मी, सर्दी और बारिश के मौसम में खुले आसमान के नीचे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। वहीं सवारियां भरने और उतारने के लिए बसों को मुख्य सड़क पर खड़ा होना पड़ता है। ऐसी स्थिति में दिन में मुख्य सड़कों पर कई बार जाम की स्थिति निर्मित होती है। इससे मुख्य सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी होती है।
इस समय जहां तापमान 44 डिग्री के आसपास चल रहा है। ऐसे में सवारियों को तेज धूप में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। जिले में शाढ़ौरा, पिपरई, नईसराय और बहादुरपुर तहसील का गठन हुआ है। इन तहसील मुख्यालय में अभी भी स्थाई बस स्टैंड की व्यवस्था नहीं हुई है। स्थानीय रहवासियों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बस स्टैंड निर्माण की मांग की है। इसके बाद भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
गुना-अशोकनगर-ईसागढ़ स्टेट हाइवे पर रुकती हैं बसें : शाढ़ौरा | तहसील मुख्यालय में गुना-अशोकनगर-ईसागढ़ स्टेट हाइवे 20 पर बसें खड़ी होती हैं। कस्बे से गुना, अशोकनगर, मुंगावली, चंदेरी, ईसागढ़, रन्नौद, इंदौर आदि स्थानों के लिए बसें गुजरती हैं। कस्बे में रोजाना करीब 50 से अधिक बसों का आना-जाना होता हैं। इसके बाद भी कस्बे में अभी तक स्थाई बस स्टैंड का निर्माण नहीं हुआ है। लोगों को गर्मी, सर्दी, बारिश के मौसम में सड़क किनारे खड़े होकर बस पकड़ना पड़ती है। बस स्टैंड पर कई बार सड़क के दोनों ओर 2 से 4 बसें खड़ी हो जाती हैं। ऐसी स्थिति दिन में कई बार बनती है। इस कारण लगने वाले जाम के कारण दूसरे वाहन चालकों को भीषण गर्मी में परेशान होना पड़ता है।
हासे स्कूल और बिजली वितरण कंपनी कार्यालय के सामने खड़ी होती हैं बसें : नईसराय | नईसराय तहसील का गठन 15 अगस्त 2013 को हुआ था। तहसील बनने के साढ़े पांच साल के बाद भी शहर को स्थाई बस स्टैंड नहीं मिल सका है। इसके लिए स्थानीय रहवासियों ने कई बार प्रशासन से मांग भी की है। इसके बाद भी प्रशासन ने लोगों की इस समस्या की तरफ ध्यान नहीं दिया। कस्बे में दो बस स्टैंड हैं। गुना, म्याना, शिवपुरी, बदरवास आदि स्थानों की ओर जाने वाली बसें हासे स्कूल के सामने मुख्य सड़क पर बसें खड़ी होती हैं। वहीं अशोकनगर, ईसागढ़, चंदेरी जाने वाली बसें बिजली वितरण कंपनी कार्यालय के सामने खड़ी होती हैं। कस्बे में रोजाना करीब 20 बसों का आना-जाना होता है। यह बसें मुख्य सड़क पर खड़ी होती हैं। यात्रियों को धूप में खड़े होकर इन बसों का इंतजार करना पड़ता है। वहीं कई यात्री होटलों और पेड़ों के खड़े होकर बस का इंतजार करते हैं। कई बार बसों के कारण शहर में जाम की स्थिति निर्मित होती है।
तहसील परिसर में खड़ी होती हैं बसें
पिपरई | पिपरई तहसील का गठन 15 अगस्त 2016 को हुआ था। तहसील मुख्यालय बनने के बाद भी कस्बे में अभी तक स्थाई बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो सका है। इस कारण कस्बे में आने वाली बसें तहसील में बालक माध्यमिक विद्यालय के सामने खड़ी होती हैं। बस स्टैंड के अभाव में सवारियों को खुले आसमान के नीचे या होटलों, चाय नाश्ते की गुमठियों या पेड़ों के नीचे बैठकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। कस्बे से चंदेरी, सेहराई, मुंगावली, अशोकनगर आदि स्थानों के लिए बसों जाती हैं।
नहीं है स्थाई बस स्टैंड
बहादुरपुर | जिला मुख्यालय में 29 जनवरी 2020 को बहादुरपुर तहसील शुरू हुई है। बहादुरपुर तहसील मुख्यालय में भी स्थाई बस स्टैंड नहीं होने से मुख्य सड़क पर बसें खड़ी होती है। इससे मुख्य सड़क पर बार-बार जाम की स्थिति निर्मित होती है। तहसील में बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों को होटलों और दुकानों पर बैठकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
बस स्टैंड नहीं होने से सड़क पर खड़ी बसें।
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source https://www.bhaskar.com/mp/ashoknagar/news/mp-news-waiting-for-passenger-buses-in-the-open-in-summer-rain-and-cold-due-to-lack-of-stand-at-tehsil-headquarters-063046-6731004.html
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