Tuesday, February 25, 2020

इस बार कोई बहानेबाजी नहीं... एक अप्रैल से शुरू होगा नया सत्र, प्रायवेट प्रकाशकों की किताबें न चलाएं स्कूल


नवंबर 2018 में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने स्कूलों के बस्तों का वजन तय करने को लेकर आदेश जारी किए थे। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट और बाल अधिकार संरक्षण आयोग की गाइड लाइन के आधार पर जारी किया गया था। कायदे से इसे 2019-20 के सत्र में लागू किया जाना था, पर मप्र में यह आदेश जिला स्तर पर पहुंचा ही नहीं। उधर कमीशनखोरी के चक्कर में स्कूलों ने चालाकी करते हुए 6 दिन पहले ही सत्र शुरू कर पालकों को उनके स्तर पर तय की गईं किताबें खरीदने को मजबूर कर दिया लेकिन इस बार हालात अलग है। 24 फरवरी को राज्य शिक्षा केंद्र की निदेशक अनुभा श्रीवास्तव ने एजुकेशन पोर्टल पर उस आदेश को जारी कर दिया है, जो केंद्रीय मंत्रालय के स्तर पर जारी किया गया था। यह पत्र लोक शिक्षण संचालनालय को संबोधित है और इसमें प्राइवेट प्रकाशकों द्वारा जारी पुस्तकों पर पूरी तरह रोक लगाने की बात कही गई है।

यह हैं स्कूलों के लिए निर्देश


{राज्य शासन व एनसीईआरटी द्वारा नियत किताब ही चलाई जाएं। कक्षा एक एवं 2 के लिए भाषा एवं गणित व कक्षा 3 से 5 के लिए गणित व भाषा के साथ पर्यावरण अध्ययन की पुस्तक शामिल की जा सकती है।

{शैक्षणिक सामग्री एवं वर्क बुक्स को कक्षा में ही रखने का इंतजाम किया जाए। इससे बच्चों के बस्ते पर अनावश्यक बोझ नहीं आएगा।

{बच्चों के मनोरंजन और शारीरिक खेलकूद को स्कूल समय में पर्याप्त स्थान दिया जाना चाहिए।

{प्राथमिक स्तर की कक्षाओं विशेष रूप से कक्षा 1 एवं 2 के लिए होमवर्क व्यवस्था बंद की जाए।

भास्कर पड़ताल

भास्कर की पड़ताल में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छोटे बच्चों को उनकी उम्र, लंबाई और उनके अपने वजन के अनुपात में ज्यादा बोझ ढोना पड़ रहा है। मसलन कक्षा 1 के एक बच्चे के बस्ते का वजन 4 किलाे 690 ग्राम निकला। यह तय सीमा से चार गुना ज्यादा है। जबकि 10वीं के बच्चे का बस्ता सिर्फ 2.624 किलो वजनी था। इस क्लास के लिए बस्ते का वजन 5 किलो तय किया गया है। अप्रैल के पहले हफ्ते में भास्कर ने बस्तों का वजन नापा था, तब तक पूरी किताबें भी बाजार में नहीं आ पाई थीं। इसके अलावा बड़ी क्लास में बच्चे जरूरत के मुताबिक ही किताबें लेकर आते हैं।

गाइडलाइन : 5 किलो से ज्यादा न हो बस्ते का वजन, कक्षा 5 तक 4 ही किताबें चलाई जाएं

2019 में तो सत्र से पहले ही निजी स्कूलों को कर दिया गया था शुरू

राज्य शिक्षा केंद्र ने तय किया यह वजन

कक्षा अधिकतम वजन अभी यह स्थिति

1 व 2 1.5 किग्रा 4.6 किग्रा

3 व 5 2-3 किग्रा

6 से 7 4 किग्रा

8 से 9 4.5 किग्रा

10वीं 5 किग्रा 2.6 किग्रा

(सुप्रीम कोर्ट और बाल संरक्षण आयोग की गाइडलाइन के बाद राज्य शिक्षा केंद्र ने स्कूलों को बस्तों के वजन इस प्रकार निर्धारित किए हैं)

डीईओ ने कहा- आदेश जारी हुए हैं तो लागू होंगे

डीईओ आरएल उपाध्याय से जब इस आदेश को लेकर बात हुई तो उन्होंने कहा कि वे हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई में आए हैं। इसलिए यह आदेश नहीं देख पाए। अगर यह एजुकेशन पोर्टल पर जारी हो गया है तो इसे लागू कराने में अब कोई समस्या नहीं आनी चाहिए। यह व्यवस्था सख्ती से लागू होगी।

अादेश काे लागू कराने के लिए इस बार शिक्षा विभाग और प्रशासन के पास है काफी समय

इस बार जिलास्तर पर इस आदेश को लागू कराने में कोई बहानेबाजी नहीं चल पाएगी। शिक्षा विभाग और प्रशासन के पास पूरा एक माह है। क्योंकि अभी स्कूलों में परीक्षा चल रही हैं। नया सत्र एक अप्रैल से शुरू होगा। स्कूलों द्वारा किताबों की सूची मार्च के अंतिम हफ्ते में जारी की जाएगी। यानी जिम्मेदारों के पास भरपूर मौका है कि वे इस गाइड लाइन को लागू करवा दें। अगर इस बार भी स्थिति नहीं बदलती है तो यह मिलीभगत का साफ उदाहरण बन जाएगा।

छोटे बच्चों पर सबसे ज्यादा चार किलो 690 ग्राम बोझ, कक्षा 10वीं का बस्ता सबसे हल्का


कमीशनखोरी... प्रकाशक थोक वितरक और निजी स्कूलों की तिकड़ी

कुछ साल पहले तक निजी स्कूल खुद ही किताबें बेचते थे, फिर किताब विक्रेताओं व पालकों के दबाव में उनसे यह हक छीन लिया गया। उम्मीद बनी कि इससे प्रतिस्पर्धा के चलते किताबों की कीमतें कम होंगी। दूसरी ओर बुक सेलर उम्मीद करने लगे कि अब उनको ज्यादा मार्जिन मिलेगा पर ऐसा नहीं हुआ। निजी स्कूलों ने विषय की बजाय प्रकाशक पर जोर देना शुरू कर दिया। इसके अलावा वे थोक वितरक भी तय करने लगे। इस पूरे कारोबार पर प्रकाशक, थोक वितरक और निजी स्कूलों की तिकड़ी काबिज हो चुकी है। रिटेल बुक सेलर को अब मनमाना मार्जिन मिलना बंद हो गया। नतीजे में पालकों को मिलने वाली छूट भी खत्म हो गई।



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source https://www.bhaskar.com/mp/guna/news/mp-news-no-excuses-this-time-new-session-will-start-from-april-1-schools-should-not-run-books-of-private-publishers-072550-6714969.html

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