Wednesday, January 1, 2020

इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के विस्थापित क्षेत्रों में पेड़-पौधे और वनस्पति से बढ़ा खुले वन का दायरा

खंडवा. निमाड़ अंचल में बढ़ते तापमान और पर्यावरण को लेकर की जा रही चिंता के बीच नये साल में जंगल से ही खुशखबरी आई है। इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक खंडवा जिले में हरियाली का दायरा बढ़ा है। निमाड़ अंचल के खरगोन, बुरहानपुर व बड़वानी इस मामले में पिछड़ गए हैं।


केंद्र सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 की तुलना में जिले में खुले वन 2032.00 थे। जबकि 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा 2089.12 हो गया। यानी 61.52 फीसदी दायरा बढ़ा है। इसके अलावा साधारण सघन वन 1161.00 से घटकर 1156.08 पर आ पहुंचकर 4.20 फीसदी कम हो गए हैं। जो कि वन विभाग के लिए चिंता का विषय है। रिपोर्ट के अनुसार

देश में 7 लाख 12 हजार वर्ग किमी के साथ भारत की 21.67 प्रतिशत भूमि पर वन आवरण है। 2017 में यह 708273 वर्ग किमी यानी करीब 21.54 प्रतिशत था।इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद वन विभाग जंगल के घटने और बढ़ने की समीक्षा करेगा।




सीसीएफ एसएस रावत ने बताया इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांध के किनारे वाले विस्थापित गांवों में पेड़, पौधे, वनस्पति के कारण जंगल का दायरा बढ़ा है। इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर बांधों के आसपास वाले बोरियामाल, सरई व अन्य टापुओं पर प्लांटेशन बढ़ा है। टापुओं के चारों तरफ पानी और हरियाली के बीच जंगल में हलचल कम हुई है। इस कारण प्लांटेशन बढ़ा है। डूब क्षेत्रों में वन विभाग ने प्लांटेशन के काम किए हैं। आगे भी कार्ययोजना अनुसार कार्य करते रहेंगे।


सात पाइंट ही चिह्नित : रोडमैप के अनुसार इसमें करीब 32 टापू हैं। हालांकि यहां सिर्फ 7 पाइंट ही चिह्नित किए गए हैं। इनमें हनुवंतिया, फेफरिया खुर्द, बलडी़, इमलानी, नजरपुरा, लाछोरा माल और पाटा खाली सेगवा-पाटा खाली छोटा शामिल है।


एक कारण यह भी : देश के बड़े बांधों में शामिल इंदिरा सागर के बैक वाटर में मप्र पर्यटन विभाग ने टापुओं की बस्ती बना दी है। इनमें से इंदिरा सागर 913 वर्ग किलोमीटर में फैला है। पर्यटन विभाग हनुवंतिया व सैलानी के बाद बोरियामाल, धारी कोटला, नागरबेड़ा सहित अन्य टापुओं को भी तेजी से विकसित किया जा रहा है। इसका प्रमुख कारण पर्याप्त मात्रा में पानी व घना जंगल भी है। क्षेत्र में जंगली जानवरों की भी कमी नहीं है। इंदिरा सागर बांध के कारण 30 जून 2004 को 25 हजार की आबादी वाले हरसूद शहर और इसके आसपास के 250 गांवों को डूबो दिया गया था।


ऐसे तैयार की गई रिपोर्ट...
टीम ने जंगल को तीन वर्गों में बांटा था। एक अत्यंत सघन वन, दूसरा साधारण सघन वन और तीसरा खुले वन। जहां वृक्षों के आवरण का घनत्व 70 प्रतिशत से अधिक है, उन्हें अत्यंत घने वन,जहां आवरण 40 से 70 प्रतिशत है, उन्हें साधारण सघन वन व जहां पर 10 से 40 प्रतिशत थे उन्हें खुले वन का नाम दिया गया। सैटेलाइट (उपग्रहों) से मिले डाटा से आकलन हुआ, जो कि 23.5 मीटर तक के सूक्ष्म क्षेत्रफल का विश्लेषण कर सकता है। आंकड़ों की पुष्टि के लिए 2200 जगहों पर जाकर रिपोर्ट ली गई। अब जिले का वन विभाग समीक्षा करेगा।




Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
इंदिरा सागर बांध पर बना सैलानी टापू हरियाली के कारण पर्यटकों को लुभा रहा है। यहां पेड़ों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।


source https://www.bhaskar.com/mp/khandwa/news/open-forest-area-increased-by-trees-and-vegetation-in-displaced-areas-of-indira-sagar-and-omkareshwar-dam-126411238.html

No comments:

Post a Comment