Sunday, January 26, 2020

51 में से मात्र 13 कंपनियों का ही पंजीयन करवाया था फरार लोन माफिया आरोपी पति-पत्नी ने

इंदौर. 100 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा करने वाले ऋण माफिया संजय और नेहा द्विवेदी द्वारा 51 कंपनियों का संचालन किया जा रहा था। ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के ठिकानों से जो दस्तावेज जब्त किए थे उनकी जांच में यह बात पता चली है कि आरोपियों ने 51 में से मात्र 13 कंपनियों का पंजियन ही कराया गया था। वहीं इन सभी 51 कंपनियों का ऑडिट भी पिछले कई सालों से नहीं कराया गया था। फिलहाल दोनों आरोपी फरार हैं जिनकी तलाश की जा रही है।


ईओडब्ल्यू के मुताबिक 20 जनवरी को आरोपी संजय और नेहा के इंदौर स्थित 5 ठिकानों पर छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया था। कार्रवाई के दौरान 25 बोरे दस्तावेज बरामद किए गए थे जिनमें से दो बोरे दस्तावेजों की जांच की जा रही है जबकि 23 बोरों को सील कर दिया गया है। दस्तावेजों की जांच में इस बात का पता चला है कि आरोपियों द्वारा जिन 51 कंपनियों का संचालन किया जा रहा था उनमें से मात्र 13 कंपनियों का पंजीयन वाणिज्यिक कर कार्यालय में कराया गया था। इसके साथ ही इन सभी 51 कंपनियों का ऑडिट भी पिछले कई सालों से नहीं कराया गया था। इस संबंध में रजिस्टार ऑफ कंपनीज से जानकारी मांगी गई है।

प्रारंभिक जांच में100 बैंक खाते मिले थे जिनकी संख्या अब बढ़कर 200 के पार पहुंच गई है।ईओडब्ल्यू के अनुसार इन खातों के माध्यम सेकरोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन होना पाया गया है। इन बैंक खातों की संख्या 240 तक पहुंच सकती है। ईओडब्ल्यू के अनुसार फिलहाल दस्तावेजों की जांच प्रारंभ है।

कंपनियों के नाम पर खरीदी 77 गाड़ियां
ईओडब्ल्यू की जांच में इस बात का भी पता चला है कि आरोपी दंपत्ती ने अपनी कंपनियों के नाम पर 77 गाड़ियां भी खरीदी थी। इन गाड़ियों में डंपर, जेसीबी, पाेकलेन, ट्रक आदि शामिल है। यह गाड़ियां उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, नागालैंड व अन्य राज्यों में पंजीकृत है। अब इन गाड़ियों को जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में संबंधित आरटीओ को पत्र लिखा जा चुका है।

बेटमा और देपालपुर में दर्ज है केस
आरोपियों के खिलाफ बेटमा और देपालपुर थाने में किसानों ने एफआईआर कराई थी। एक पीड़ित महेश पुरी ने 11 जनवरी को ही धोखाधड़ी करने सहित अन्य मामलों में केस दर्ज कराया। मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई की जाती इसके पहले ही पति-पत्नी फरार हो गए जिनकी तलाश की जा रही है।


निजी बैंक में नौकरी के दौरान सीखा था फर्जीवाड़ा
आरोपी संजय 2012-13 से ठगी कर रहा है। ऑनलाइन जारी होने वाले टेंडर के प्रिंट आउट निकालकर वह लोगों को प्रोजेक्ट मिलने का झांसा देता था। फिर उन्हें पार्टनर बनाता, उनकी संपत्ति बैंक में बंधक रखवाता और लोन निकाल लेता। संजय और पत्नी नेहा 2006-07 में एक निजी बैंक में नौकरी करते थे। यहीं दोनों ने सीखा कि किस तरह फर्जी कंपनी, दस्तावेज बनाकर लोन लिया जा सकता है। इसके बाद दोनों ने नौकरी छोड़ दी।



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100 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े के आरोपी संजय और नेहा द्विवेदी।


source https://www.bhaskar.com/mp/indore/news/only-13-companies-were-registered-out-of-51-the-absconding-loan-mafia-accused-husband-and-wife-126610171.html

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