Thursday, January 2, 2020

1.42 लाख बच्चों को बता चुके हैं- नो सिंगल यूज प्लास्टिक

सोशल मीडिया पर आई कोई फोटो किसी की जिंदगी भी बदल सकती है... इसी की मिसाल हैं मुरैना के बृजेश शर्मा। टीसीएस में जॉब कर रहे बृजेश गांधीनगर में पोस्टेड थे। एक रोज उनके फेसबुक फ्रेंड ने एक फोटो शेयर की, जिसमें एक पक्षी पॉलीथीन में फंसा हुआ था। इस फोटो ने बृजेश को मजबूर किया कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक के बारे में पढ़ें और समझने की कोशिश करें कि यह कितना खतरनाक है। और इस रिसर्च के बाद बृजेश ने जमी-जमाई नौकरी छोड़ी और साइकिल से पूरे देश के हर एक राज्य में पहुंचने और बच्चों व युवाओं को सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने का मैसेज देने की ठानी। गुरुवार को बृजेश भोपाल पहुंचे थे, अपनी कहानी और मिशन को उन्होंने साझा किया। पढ़िए उन्हीं के शब्दों में-

सफर की शुरुआत 17 सितंबर 2019 को गांधीनगर से की। इस यात्रा में मुझे 23,000 किमी. तय करने हैं। मैं अभी तक गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, यूपी को पूरा कर चुका हूं और अब मप्र आ पहुंचा हूं। अभी तक 6900 किमी. साइकिल का सफर तय किया है और इस दौरान 1.42 लाख स्टूडेंट्स से मिला और सिंगल यूज प्लास्टिक के नुकसान पर बात की। बच्चों से यह मुलाकात सिर्फ भाषण न रह जाए, इसके लिए मैं बैग में कुछ तस्वीरें रखता हूं। पॉलीथीन और बोतलों से भरे कूड़ा घर की तस्वीरें दिखाता हूं, ताकि वे समझें कि वे जिसे सिर्फ एक प्लास्टिक मानते हैं या एक वॉटर बॉटल मानते हैं, वह कितनी बड़ी समस्या है। सिंगल यूज प्लास्टिक आपके फेंक देने के बाद किसी दूसरे के पास चली जाती है। अाैर फिर कभी काेई पक्षी इससे जूझता है अाैर कभी गाय के पेट से 40-45 किलाे प्लास्टिक निकलती है। मैं उन सभी स्कूलाें से पता करता हूं कि मेरे जाने के बाद बच्चाें में क्या अंतर आया। अच्छा लगता है, जब पता चलता है कि बच्चों ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ नाटक तैयार किया या बच्चों और टीचर्स ने पॉलीथीन लाना बंद कर दिया।

पर्यावरण का प्रहरी

सिटी रिपोर्टर . भोपाल

बृजेश शर्मा और वो ‌फोटो जिसने उनकी जिंदगी बदल दी

सबने कहा- सरकारें नहीं बदल सकीं, तुम अकेले कैसे बदलोगे?

सिर्फ मेरा बदल जाना ही शुरुआत के लिए काफी है

नौकरी छोड़कर इस तरह से साइक्लिंग के लिए निकलना मुश्किल तो है। मेरे दोस्तों और परिवार के सदस्यों में से किसी एक ने भी यह नहीं कहा कि मैं इस सफर पर निकलकर अच्छा कर रहा हूं। सभी का कहना था- सरकारें नहीं बदल सकीं, तुम अकेले कैसे बदलोगे? लेकिन, मुझे लगता है कि सिर्फ मेरा बदल जाना ही एक शुरुआत के लिए काफी है। नौकरी की सेविंग्स से खर्च चलाता हूं और सफर ज्यादा महंगा ना पड़े इसके लिए मैं अक्सर मंदिर में या ढाबे पर सो जाता हूं, ताकि ज्यादा पैसे खर्च न हों। सिर्फ मुश्किलें तब आती हैं, जब रात होने वाली हो और आगे 15 से 20 किलोमीटर में सिर्फ जंगल हो। ऐसा मौका भी आया, जब मैंने जंगल में रात काटी। यह डरावाना था, लेकिन प्रकृति के बीच रहने का मजा भी आया।



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Bhopal News - mp news 142 lakh children have been told no single use plastic
Bhopal News - mp news 142 lakh children have been told no single use plastic


source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/mp-news-142-lakh-children-have-been-told-no-single-use-plastic-065542-6299678.html

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