इंदाैर. पातालपानी स्थित अपने फार्म हाउस में 31 दिसंबर की पार्टी के दाैरान हादसे में महू के ख्यात उद्योगपति पुनीत अग्रवाल, उनके दामाद ट्रांसपोर्टर पल्केश पिता मुकेश अग्रवाल निवासी डीबी सिटी इंदाैर, बेटी पलक, पोते नव, पल्केश के जीजा गाैरव अग्रवाल निवासी मुंबई, गौरव के बेटे आर्यवीर की मौत हो गई। गौरव की पत्नी निधि गंभीर रूप से जख्मी हैं।
उद्योगपति अग्रवाल की मौत से पूरे महू में मातम छा गया। शोकस्वरूप बुधवार को महू के बाजार बंद रखे जाएंगे। अग्रवाल के निधन से इंदौर से लेकर मुंबई तक दोस्त और रिश्तेदारों में शोक छा गया। बचपन के दोस्त राहुल पाराशर सहित अधिकांश इंदौर से बाहर थे। अग्रवाल की मौत के बाद वे इंदौर के लिए निकल गए। कांग्रेस नेता अरविंद बागड़ी ने बताया कि अग्रवाल के दामाद पल्केश का इंदौर में यूपी-गुजरात फ्रेट केरियर्स नाम से ट्रांसपोर्ट कारोबार है।
पोते से प्यार : बाल दिवस पर उसके नाम गोद लिया था टाइगर
उद्योगपति अग्रवाल ने वर्ष 2018 में बाल दिवस के दिन 14 नवंबर को पोते नव के नाम से इंदौर के चिड़ियाघर में टाइगर के शावक को गोद लिया था। उस शावक का नाम भी टाइगर नव रखा था। इसके लिए करीब दो लाख 31 हजार रुपए का चेक दिया था।
खेल का शौक : विंबलडन देखने के लिए जाते थे लंदन
बताया जाता है कि अग्रवाल को लाॅन टेनिस का शौक इस कदर था कि वे विंबलडन देखने के लिए लंदन जाते थे। उन्होंने हाल ही में डेली कॉलेज में आयोजित मध्यप्रदेश स्टेट रैंकिंग मैन डबल्स टेनिस स्पर्धा में भी हिस्सा लिया था। उन्होंने पातालपानी के अपने फॉर्म हाउस में टेनिस कोर्ट भी बनवा रखा था। शहर के कैंटोनमेंट कार्यालय प्रांगण स्थित टेनिस कोर्ट में रोज टेनिस खेलने जाते थे। शहर में किसी भी तरह का बड़ा सामाजिक या खेल का आयोजन होता था तो अग्रवाल उसके प्रायोजक रहते थे। वे हर साल इंदौर में हाेने वाली मैराथन दाैड़ के प्रायाेजक भी रहते थे। अग्रवाल सामाजिक व खेलकूद जैसे किसी भी बड़े आयाेजन में हमेशा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे।
76 नंबर का जुनून : बंगले से लेकर सभी गाड़ियों में इसी नंबर का इस्तेमाल
उद्योगपति पुनीत अग्रवाल के परिचितों का कहना है कि उन्हें 76 नंबर काफी पसंद था। उनके बंगले का नंबर 76 था और उनकी सभी गाडि़यों में आगे पीछे कहीं न कहीं 76 नंबर होता ही था। वे अच्छे समाजसेवी थे और हर किसी की मदद के लिए तैयार रहते थे। बताया जा रहा है कि अग्रवाल सड़क के नामी ठेकेदार थे। देशभर में उनके कई टोल प्लाजा चल रहे हैं। उनके संस्थान में चार हजार से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं।
इंदौर वासियों के मार्ग इन्होंने ही सुगम किए : विजयवर्गीय
मैं अभी द्वारिका में हूं। यहां मुझे इस दुखद घटना की जानकारी मिली है। उनके परिवार के छह लोगों की मौत हुई है। मेरे बेटे विधायक आकाश विजयवर्गीय अभी वहीं मौजूद हैं। पुनीत अग्रवाल अच्छे समाजसेवी, अच्छे व्यवसायी और दोस्त थे। मेरे उनके पारिवारिक संबंध थे। वर्ष 2004 में सिंहस्थ के दौरान महू-मंडलेश्वर रोड उन्होंने ही बनवाई थी, जिसकी बदौलत आज जाम गेट तक लोग आसानी से जा पाते हैं। इसके अलावा एमआर 10 पर पहला रेलवे ओवरब्रिज, महती परियोजना इंदौर-खलघाट नेशनल हाईवे में भी उनका योगदान रहा है। साथ ही जयपुर-रींगस के बीच फोरलेन रोड, झांसी-उरई रोड, आगरा-ग्वालियर रोड जैसे कई नेशनल हाईवे के काम किए हैं। दरअसल, पुनीत ऐसे कॉन्ट्रैक्टर थे, जो किसी भी अटके हुए प्रोजेक्ट को पूरा करते थे। जो काम कोई नहीं कर सकता था उसे पुनीत पूरा कर देते थे।
-कैलाश विजयवर्गीय, राष्ट्रीय महासचिव भाजपा और पुनीत अग्रवाल के अभिन्न मित्र
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