Saturday, December 7, 2019

मित्रता सदैव स्वार्थ रहित होनी चाहिए: शास्त्री

दमोह। स्थानीय सिविल वार्ड 7 में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन की कथा सुनाते हुए कथावाचक आचार्य पं. रवि शास्त्री महाराज ने कहा कि मित्रता हो तो सुदामा व श्रीकृष्ण के जैसी।

सुदामा एक निर्धन ब्राह्मण था, श्री कृष्ण द्वारिकाधीश होने के साथ-साथ परमात्मा हैं, ब्रह्मांड के पालक संचालक हैं। सुदामा परमात्मा श्री कृष्ण के विद्यार्थी जीवन से मित्र होने के साथ परमात्मा का नित्य उपासक था। घर में अत्यधिक निर्धनता के कई दिनों तक सुदामा को सपरिवार भूखे पेट ही सोना पड़ता था।

इतना सब होने के बाद भी सुदामा ने कभी किसी प्रकार से अपने परमात्मा व मित्र श्री कृष्ण से कोई शिकायत नहीं की न ही कभी किसी को यह पता लगने दिया कि श्री कृष्ण उनके मित्र हैं।

शास्त्री ने कहा कि मित्रता में कहीं किसी भी प्रकार का स्वार्थ नहीं होना चाहिए। मित्रता सदैव स्वार्थ रहित होनी चाहिए व मित्र को मित्र के लिए सहयोगात्मक कार्य करते हुए मित्रता को कभी भी धोखे में नहीं बदलना चाहिए, धोखेबाज मित्र से सदैव सावधान रहना चाहिए।



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