Tuesday, December 24, 2019

असल मायने में इंसानियत का नाम ही यज्ञ है: डॉ. पंडया

108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ के दूसरे दिन एक लाख से अधिक आहुतियां दो पालियों में छोड़ी गईं। दूसरे दिन युवा संवाद के लिए युवा प्रकोष्ठ देव संस्कृति विश्व विद्यालय हरिद्वार के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या पहुंचे। इन्होंने युवाओं को संबोधित किया। इस बीच विधायक जज पाल सिंह को गुरुदेव का साहित्य भेंट किया गया।

उन्होंने कहा जीवन को अपनी अच्छी सोच, अच्छी दिशा के साथ जीना चाहिए। वर्तमान समय में हर एक व्यक्ति को चिंता है, वह बड़ा हो या छोटा आज के जमाने में किसी दूसरे की खुशी को जब लोग देखते हैं तो उसकी खुशी देखकर जलन होने लगती है। आज के जमाने में इंसानियत तो बची ही नहीं है। इंसानियत खत्म होती जा रही है। उन्होंने कहा इंसानियत का नाम ही यज्ञ है। किसी की मदद करना यज्ञ में आहुतियां देने के बराबर है। गायत्री परिवार के हर सदस्य का दिल बड़ा होता है। अगर हम बच्चे को बांटना सिखा दें तो वह भी देवता बन जाता है। अगर हर आदमी के अंदर देवता जाग जाए तो स्वर्ग में जाने की जरूरत नहीं होगी। यज्ञ का सच्चा अर्थ मानव मानवता होता है। हमारे समाज के अंदर अंतिम संस्कार ही यज्ञ है।

समारोह में अथिति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या का स्वागत करते हुए।

खुद ने लिया संकल्प अब घर-घर पहुंचकर दिलाएंगे

प्रज्ञा पुराण मंच से राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिशंकर रघुवंशी ने नशा मुक्ति अभियान चलाने के लिए संकल्प लिया है। उन्होंने मंच से कहा वे समाज के बीच पहुंचेंगे और हर युवा को संकल्प दिलाएंगे।

आज गर्भवती माताएं जड़ी बूटियों से करेंगी संस्कार

बुधवार को यज्ञ स्थल पर कई संस्कार किए जाएंगे। गर्भवती महिलाओं के बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए जड़ी बूटी से संस्कार किए जाएंगे। आधे घंटे यह आयोजन किया जाएगा। गर्भवती महिलाएं जड़ी बूटी को पेट से स्पर्श कराकर संस्कार को पूरा करेंगी। इसके अलावा नामकरण संस्कार, अन्य प्रासन संस्कार भी किए जाएंगे। इसके लिए गर्भवती महिलाएं अपने घर से खीर लेकर जाएंगी। इसे संस्कार के बाद गर्भवती महिलाओं को खिलाया जाएगा।



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Ashoknagar News - mp news in the real sense the name of humanity is yajna dr pandya


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