कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह ताेमर ने भी माेबाइल फाेन पर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। उऩ्हाेंने कहा कि डाॅ. दिवाकर विद्यालंकार न केवल शहर आैर प्रदेश बल्कि देश के मूर्धन्य विद्वानाें में से एक थे। हिंदी आैर संस्कृत के साथ ही अंग्रेजी भाषा पर भी उनका अधिकार था। शिक्षा, साहित्य के साथ ही धर्म आैर अध्यात्म के क्षेत्र में भी उनका प्रभावी हस्तक्षेप था। लाेग उनके विचाराें आैर वक्तृत्व से लाेग काफी प्रभावित थे।
श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मंत्री ध्यानेंद्र सिंह, अखिलेंदु अरजरिया, आलाेक शर्मा, अभय पापरीकर, महेश मुदगल, डाॅ. केशव पांडेय,डाॅ. सुरेश सम्राट, तुलसी मानस प्रतिष्ठान के राकेश जादाैन, रामबाबू कटारे, राजेंद्र सेठ, जेपी पाठक, मदन बाथम, हरिदास अग्रवाल, उपेंद्र बैस ने भी भावांजलि अर्पित की। इसके साथ ही देवेश शर्मा, शरद गाैतम, विह्वल सेंगर, रूपसिंह पाल, राजपाल जादाैन, पारिताेष शर्मा, महेंद्र सेंगर आदि ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मानस भवन में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मौजूद अतिथि।
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