भोपाल. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर व्यापमं महाघोटाले की जांच सीबीआई को सौंपने के बाद लंबित शिकायतों की जांच कर रही स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने शनिवार को तीन और छात्रों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में एफआइआर दर्ज की है। एक छात्र ने फर्जी मूल निवासप्रमाण पत्र के आधार पर मप्र राज्य कोटा से गांधी मेडिकल कालेज (जीएमसी) भोपाल में दाखिला लिया था। जबकि दो छात्रों की फोटो में मिलान नहीं होने के बाद भी उन्हें एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा और जीआरएमसी ग्वालियर में प्रवेश मिला था। यह परीक्षार्थी पीएमटी 2007 और 2009 में शामिल हुए थे।
एसटीएफ अब डीएमई, मेडिकल कालेज की टीम और व्यापमं के इनविजिलेटर से पूछताछ करेगी। एसटीएफ के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2015 में व्यापमं महाघोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। गृह मंत्री के आदेश के बाद सितंबर 2019 में लंबित शिकायतों की जांच एसटीएफ द्वारा शुरू की गई थी। शिकायतों की जांच के दौरान जब्त किए दस्तावेजों में गड़बड़ियां उजागर हुई थीं।
एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार जांच में सामने आया कि देवाशीष विश्वास पीएमटी-2007 में शामिल हुआ था। उसने लिखित परीक्षा पास की थी। उसके द्वारा मप्र का मूल निवासी प्रमाण पत्र अन्य दस्तावेजों के कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया था। काउंसिलिंग और दस्तावेज परीक्षण के बाद उसे जीएमसी भोपाल में दाखिला मिला था। एसटीएफ ने जब जांच की तो देवाशीष द्वारा जमा किया मप्र का मूल निवासी प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। इसी तरह पल्लव अमृतफाले और हितेश अलावा पीएमटी-2009 में शामिल हुए थे। काउंसिलिंग और दस्तावेज परीक्षण के बाद पल्लव को एसएस मेडिकल कॉलेज रीवा और हितेश को जीआरएमसी ग्वालियर में प्रवेश मिला था।
परीक्षा केंद्र पर नहीं हुआ था फोटो का मिलान
जांच में खुलासा हुआ था कि परीक्षा केंद्र पर पल्लव और हितेश की फोटो का मिलान नहीं हुआ था। इसमें परीक्षा केंद्र पर व्यापमं के इनविजिलेटर की लापरवाही सामने आई है। एसपी भदौरिया के मुताबिक व्यापमं के इनविजिलेटर के अलावा काउंसिलिंग व दस्तावेज परीक्षण टीम में शामिल डीएमई के अधिकारियों व मेडिकल कॉलेज के सदस्यों से भी पूछताछ की जाएगी।
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source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/fir-on-3-students-one-took-admission-on-fake-native-certificate-stf-action-after-investigation-126404208.html
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