
गुना| काल भैरव अष्टमी पर भैरवनाथ की जयंती पर दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। कालभैरव महाकाली के ललाट से प्रकट हुए। सृष्टि में आदिकाल से कालभैरव की पूजा तंत्र साधना के साथ संपन्न होती है। जिला मुख्यालय पर स्थित काल भैरव मंदिर सर्किट हाउस के सामने धार्मिक अनुष्ठान, अखंड रामायण का आयोजन हुआ। अंचल भर के विभिन्न भैरव मंदिरों पर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। बौद्धिक सभा में हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि शिवपुराण, देवी भागवत, भैरव उपासक आदि ग्रंथों में काल भैरव की उत्पत्ति की कथा को वर्णित है। अहंकार पूर्ण बाते करने वाले ब्रह्मा के पांचवें मस्तक का विच्छेदन के बाद भगवान शिव ने प्रकट होकर कालभैरव को काशी विश्वनाथ के स्थान का कोतवाल बनाया। तब से ही कालभैरव सिद्ध देवी पीठों, ज्योतिर्लिंगों के निकट जाग्रत देव के रूप में स्थापित हैं। इस अवसर पर नवमी पर सामूहिक भंडारे का आयोजन होगा।
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https://www.bhaskar.com/mp/guna/news/mp-news-unbroken-ramayana-recitation-with-religious-ritual-on-bhairavashtami-072616-5990541.html
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