Wednesday, November 27, 2019

भोपाल लैब में 3 माह से 5500 खाद्य नमूनों की जांच रूकी, क्योंकि... 15 केमिस्ट का काम 5 के जिम्मे

प्रदेश सरकार का शुद्ध के लिए युद्ध अभियान थम सा गया है। खरगोन जिले के तीन माह में 250 विभिन्न खाद्य सामग्री के भेजे सैंपल भोपाल स्थित राज्य प्रयोगशाला में पेडिंग हैं। जांच रिपोर्ट नहीं आई है। प्रदेश में एकमात्र सरकारी लैब भोपाल के ईदगाह हिल्स में है। जबकि सरकार के अभियान सहित पिछले तीन माह में प्रदेश के विभिन्न जिलों से 9 हजार सैंपल आ गए। 5500 सैंपल की जांच बाकी है। उनकी जांच व रिपोर्ट तैयार करने में जनवरी का महीना आ जाएगा। 250 सैंपल जिले के भी शामिल हैं। नियमानुसार 14 दिनों में सैंपल की जांच के बाद रिपोर्ट मिल जाती है। खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि लैब में वैज्ञानिकों की संख्या की तुलना में ज्यादा सैंपल पहुंचे हैं। इसलिए रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। रिपोर्ट नहीं मिलने से फिलहाल जांच व सैंपलिंग रोक दी गई है। खाद्य एवं औषधि विभाग के ज्वाइंट कंट्रोलर देवेंद्र नागेंद्र ने बताया कि प्रदेशभर में तीन माह में 9 हजार सैंपल मिले थे। इन सैंपलों में 3500 की जांच हो चुकी है। बुधवार को भोपाल में स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने प्रदेशभर के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की बैठक ली है।

इसलिए ब्रेक : नहीं जुटाए स्टाफ और संसाधन, 15 दिन से नहीं लिए सैंपल

सरकार ने शुद्ध के लिए युद्ध अभियान शुरू तो कर दिया है लेकिन संसाधन व स्टाफ नहीं जुटाया है। अभियान के पहले फूड सेफ्टी एक्ट में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के एक सुरक्षा अधिकारी को हर माह 12 फूड सैंपल लेकर भेजना अनिवार्य है। इसमें 8 सर्विलांस और 4 लीगल सैंपल शामिल होते हैं।

- शायर मिर्जा गालिब के पैमान-ए-गजल से

शुद्ध के लिए युद्ध अभियान पर ब्रेक : भोपाल में हर केमिस्ट रोज 50 सैंपल जांचे तब भी रिपोर्ट आने में दो माह लगेंगे

यह भी जानिए... प्रदेश की लैब में अभियान के कारण इस साल 40 हजार सैंपल आने का अनुमान

प्राइवेट लैब में सर्विलांस की कराएंगे जांच

नियमानुसार लैब में लीगल सैंपलों की जांच में 14 दिन का समय लगता है। जबकि सर्विलांस सैंपल जैसे टोमेटो कैचअप, ऑलिव ऑयल, व्हिस्की, हल्दी, मैंगो शेक, अमूल मिल्क मेड, मावा खुला, पापकाॅर्न, मूंगफली दाने सहित अन्य सामग्री की कोई डेडलाइन नहीं है। इसी का फायदा कारोबारी मिलावटी व अमानक स्तर के खाद्य पदार्थों का कारोबार में उठा रहे हैं। अफसर सर्विलांस सैंपल की जांच जबलपुर की एक प्राइवेट लैब से कराने की बात कर रहे हैं। इसमें दो महीने का समय लगेगा। स्टाफ कम होने से जांच एक से तीन माह लग रहे हैं। लैब के अफसरों के मुताबिक जांच अधिकारी चाहे तो समय बढ़ा भी सकते हैं।

( ये तंज इसलिए... क्योंकि मप्र सरकार की सादगी भी ऐसी ही है। दावा है कि शुद्ध के लिए युद्ध लड़ रहे हैं जबकि हकीकत में युद्ध लड़ने के लिए जरूरी हथियार ही सरकार के पास नहीं है। शुद्धता की जांच के लिए पर्याप्त लैब हैं न संसाधन और न ही पर्याप्त टेक्नीशियन। नतीजा-युद्ध बीच में ही रोक दिया गया है।)

प्रदेश लैब में सालाना 15 हजार आते हैं, 3 माह में आए 9 हजार सैंपल

ज्वाइंट कंट्रोलर ने बताया कि सालभर में एक जिले से औसतन 300 सैंपल लेकर भेजे जा रहे थे। साल में प्रदेशभर के 15 हजार सैंपल भेजे जाते हैं। इस बार अभियान के कारण तीन माह में ही 9 हजार सैंपल आ चुके हैं। अब सालाना आंकड़ा 30 से 40 हजार सैंपल तक पहुंचने की संभावना है। स्टाफ व संसाधन बढ़ाने की मांग की गई है।

4 माह पहले सेगांव में घी की सैंपलिंग हुई, िरपोर्ट नहीं आई।

लीगल और सर्विलांस सैंपल में अंतर

अफसरों ने बताया कि सर्विलांस सैंपल सिर्फ निगरानी के लिए होते हैं। जांच में सैंपल फेल होने पर निर्माता और व्यापारी को इंप्रूवमेंट नोटिस दिया जाता है। इस पर कोई केस दर्ज नहीं किया जाता। ताकि व्यापारी कार्रवाई के डर से अमानक खाद्य पदार्थ न बेचे। इसकी वजह खाद्य सुरक्षा कानून में सैंपल फेल या मिथ्या छाप पाए जाने पर कंपनी पर सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं करने का प्रावधान है। इस कारण खाद्य अधिकारी खाद्य पदार्थ का लीगल सैंपल लेने से पहले सर्विलांस सैंपल लेते हैं। लीगल सैंपल लेने के बाद फेल होने पर सीधे जुर्माना या सजा का प्रावधान है।

भोपाल लैब : 5 की जगह एनालिस्ट भी 2

भोपाल स्थित स्टेट फूड लैबोरेटरी में राज्य के सभी जिलों से खाद्य पदार्थों के सैंपल आते हैं। सैंपल की जांच की जिम्मेदारी लैब में कार्यरत दो फूड एनालिस्ट पर है। जबकि लेबोरेटरी में फूड एनालिस्ट के 5 पद स्वीकृत हैं। लंबे समय से तीन फूड एनालिस्ट नहीं होने से खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट खाद्य अधिकारियों को समय पर नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा 10 से 15 केमिस्ट की जरुरत है लेकिन 5 केमिस्ट ही काम कर रहे हैं।

नतीजा ... खरगोन जिले के 250 सैंपल की रिपोर्ट भी नहीं आई, अभियान में अब नई सैंपलिंग भी बंद कर दी

दो मामलों से समझिए रिपोर्ट की देरी से कार्रवाई में परेशानी

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पांच क्विंटल जब्त मावे की 4 माह बाद भी नहीं आई रिपोर्ट

29 जुलाई को सेगांव के शिव डेयरी पर रात में जिला प्रशासन के दल ने कार्रवाई की थी। यहां पांच क्विंटल मावा जब्त किया था। इसके सैंपल भेजे थे। चार माह में भी जांच नहीं आई है। यहां उप्र निवासी सचिन मिश्रा दो साल से डेयरी संचालित कर रहा था।

राजस्थान व गुजराती परिवार के लोगों ने बेचा संदिग्ध घी

2 अगस्त को जैतापुर में नकली घी बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह को एसडीएम अभिषेक गेहलोत ने पकड़ा था। यहां गुजरात व राजस्थान के तीन परिवार किराए के मकान में वनस्पति व तेल को मिलाकर नकली घी बनाते थे। इनके कब्जे से 50 किलो नकली घी जब्त किया था। सैंपल भेजे हैं। रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है।

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3 फूड एनालिस्ट के पदपूर्ति और 10 केमिस्ट की मांग की है

3 फूड एनालिस्ट के पदपूर्ति व 10 केमिस्ट की मांग की है। यदि पर्याप्त स्टाफ मिल जाता है तो दिसंबर तक 9 हजार मामलों की जांच पूरी हो जाएगी। फिलहाल 3500 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। - देवेंद्र नागेंद्र, संयुक्त नियंत्रक खाद्य एवं औषधि विभाग, भोपाल



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Khargon News - mp news testing of 5500 food samples stopped in bhopal lab for 3 months because 15 chemists responsible for 5


source https://www.bhaskar.com/mp/khargon/news/mp-news-testing-of-5500-food-samples-stopped-in-bhopal-lab-for-3-months-because-15-chemists-responsible-for-5-082034-6044554.html

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